रांची, 16 अक्टूबर 2026: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS), रांची में मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने, चिकित्सकों की कमी दूर करने और मेडिकल शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए कई बड़े बदलावों की तैयारी है। संस्थान की 66वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक में 10 नए विभाग शुरू करने, सुपर स्पेशियलिटी और पीजी की सीटें बढ़ाने तथा परिसर के विकास पर 466 करोड़ रुपये खर्च करने सहित कई प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया।
बैठक में नर्सों के 106 नए पद सृजित करने, 100 आयुष्मान मित्रों की बहाली और अस्पताल प्रबंधन के लिए नए पद बनाने की योजना पर भी सहमति बनी। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव और बर्न वार्ड को आधुनिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
10 नए विभागों से बढ़ेंगी सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं
RIMS में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एंडोक्रिनोलॉजी, क्लिनिकल हेमेटोलॉजी, रूमेटोलॉजी, न्यूरो एनेस्थीसिया, कार्डियक एनेस्थीसिया, न्यूक्लियर मेडिसिन और इमरजेंसी मेडिसिन सहित 10 नए विभाग शुरू करने की योजना है।
इन विभागों के शुरू होने से गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधा बढ़ने की उम्मीद है। इससे मरीजों को संबंधित विशेषज्ञों से इलाज कराने के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम हो सकती है।
सुपर स्पेशियलिटी की 150 और पीजी की 250 सीटों का लक्ष्य
बैठक में सुपर स्पेशियलिटी की सीटें मौजूदा 11 से बढ़ाकर 150 करने की प्रक्रिया तेज करने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही पीजी की सीटें 176 से बढ़ाकर 250 करने की योजना है।
चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए RIMS नियमावली में जरूरी संशोधन तथा नई चयन समिति के गठन के प्रस्ताव पर भी सहमति दी गई। इसके अलावा चिकित्सकों के 319 पदों के पुनर्गठन और 16 नए पद सृजित करने की योजना है।
प्रोन्नति में मरीजों के इलाज और पढ़ाने के अनुभव को महत्व
RIMS में चिकित्सकों की प्रोन्नति के लिए नई सेवा शर्तों को मंजूरी दी गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रिसर्च पेपर के अलावा पीजी विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने और मरीजों के इलाज में योगदान करने वाले चिकित्सकों को भी अतिरिक्त अंक तथा प्राथमिकता दी जाएगी।
इस बदलाव का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा, शोध और मरीजों की सेवा—तीनों क्षेत्रों में चिकित्सकों के योगदान को महत्व देना है।
नर्सों के 106 और हॉस्पिटल मैनेजर के 12 पद बनेंगे
नर्सिंग सेवाओं को मजबूत करने के लिए 106 नए पद सृजित किए जाएंगे। इसके अलावा 144 नर्सिंग कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया भी चल रही है।
अस्पताल के संचालन और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए हॉस्पिटल मैनेजर के 12 पद बनाने की योजना है। आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को सहायता देने के लिए 100 आयुष्मान मित्रों की भी बहाली की जाएगी।
नॉन-टीचिंग पदों का पुनर्गठन
गवर्निंग बॉडी की बैठक में नॉन-टीचिंग पदों की संख्या 1,962 से घटाकर 1,862 करने का निर्णय लिया गया। पुनर्गठन के तहत आईटी मैनेजर, हॉस्पिटल मैनेजर और लैब टेक्नीशियन जैसे जरूरी तकनीकी तथा प्रबंधन संबंधी पदों पर ध्यान दिया जाएगा।
बैठक में RIMS रेगुलेशन, 2014 के स्थान पर रेगुलेशन एक्ट, 2026 लाने का निर्णय भी लिया गया है।
परिसर के विकास पर खर्च होंगे 466 करोड़ रुपये
RIMS परिसर के कायाकल्प के लिए 466 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इसके तहत विभागों, छात्रावासों, डॉक्टरों के आवासीय परिसर और अन्य भवनों का विकास किया जाएगा।
पीजी विद्यार्थियों और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए डीआईजी ग्राउंड में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर छात्रावास बनाने की योजना है। यहां डॉक्टर निर्धारित शुल्क देकर रह सकेंगे। इसी मैदान में आधुनिक खेल परिसर विकसित करने का भी प्रस्ताव है।
ईको और अल्ट्रासाउंड मशीनों की होगी खरीद
मरीजों को जांच के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े, इसके लिए नई ईको और अल्ट्रासाउंड मशीनें खरीदी जाएंगी।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के अनुसार, इन जांचों के लिए मरीजों को कई बार लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे उपचार में देरी हो सकती है। नई मशीनों की खरीद से जांच सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सुरक्षा की जिम्मेदारी चरणबद्ध तरीके से सैप को
RIMS परिसर की सुरक्षा व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से स्पेशल ऑक्सिलरी पुलिस (SAP) को सौंपने की योजना है। इसके तहत वर्तमान में तैनात होमगार्ड जवानों की संख्या धीरे-धीरे कम की जाएगी और सुरक्षा की जिम्मेदारी SAP के जवानों को दी जाएगी।
अस्पताल के प्रशासनिक और तकनीकी कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए 10 नई समितियां गठित करने का भी निर्णय लिया गया है। इनमें स्थायी एवं लेखा समिति, स्थायी प्रोन्नति समिति, स्थायी शैक्षणिक समिति, स्थायी संपदा समिति, स्थायी तकनीकी समिति, स्थायी भंडार एवं निविदा समिति, स्थायी अस्पताल समिति और स्थायी सुरक्षा समिति शामिल हैं।
निदेशक के कार्यकाल पर कैबिनेट लेगा फैसला
बैठक में RIMS के प्रभारी निदेशक प्रो. डॉ. डीके सिन्हा को कार्यकाल विस्तार देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। अंतिम निर्णय के लिए प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जाएगा। वहीं, स्थायी निदेशक की नियुक्ति के लिए जल्द विज्ञापन जारी करने की बात कही गई है।
यदि समय पर मंजूरी नहीं मिलती है, तो संस्थान में नए प्रभारी निदेशक की नियुक्ति करनी पड़ सकती है। स्थायी निदेशक की नियुक्ति तक मौजूदा प्रभारी निदेशक को पद पर बनाए रखने के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट विचार करेगा।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने निर्देश दिया कि गवर्निंग बॉडी की बैठक में लिए गए निर्णयों को अगली बैठक तक लंबित न रखा जाए और समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि मरीजों, विद्यार्थियों और डॉक्टरों को उनका लाभ मिल सके।
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