Thursday, October 29, 2026

UPI पेमेंट पर कब लगेगा MDR चार्ज? NPCI के नए अपडेट से समझें क्या बदलेगा.

Share

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के 13 अक्टूबर के नोटिस के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की समयसीमा दीपावली के बाद तक टाल दी गई है। हालांकि, नई तारीख को लेकर अलग से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

ऐसे में दुकानदारों और ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि MDR क्या होता है, यह किन लेन-देन से संबंधित हो सकता है और क्या हर UPI भुगतान पर कोई नया शुल्क लगेगा।

क्या है MDR और किस पर पड़ सकता है असर?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वह शुल्क है, जो निर्धारित शर्तों के तहत किसी व्यापारी के डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर संबंधित भुगतान व्यवस्था में लिया जा सकता है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चर्चा चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन से जुड़ी है। P2M का मतलब है किसी दुकान, कारोबारी या व्यापारी को भुगतान करना।

इसलिए किसी दुकान पर QR कोड स्कैन करके भुगतान करने और किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को पैसे भेजने को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी में सभी तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर एक साथ नया शुल्क लागू करने की घोषणा नहीं बताई गई है।

0.4 प्रतिशत शुल्क का गणित क्या कहता है?

खबर में दी गई 0.4 प्रतिशत की दर और 300 रुपये की अधिकतम सीमा के आधार पर गणना को इस तरह समझा जा सकता है। ये केवल गणितीय उदाहरण हैं, किसी नए शुल्क के लागू होने की पुष्टि नहीं।

ट्रांजैक्शन राशि0.4% के हिसाब से रकम
₹5,000₹20
₹10,000₹40
₹1,00,000₹400

यदि किसी विशेष श्रेणी पर 300 रुपये की अधिकतम सीमा लागू होती है, तो एक लाख रुपये के ट्रांजैक्शन पर गणना के अनुसार 400 रुपये बनने के बावजूद शुल्क 300 रुपये तक सीमित हो सकता है। लेकिन यह तभी लागू होगा, जब संबंधित ट्रांजैक्शन उस श्रेणी के नियमों के अंतर्गत आता हो।

ध्यान दें: शुल्क की वास्तविक दर, अधिकतम सीमा, पात्रता और छूट की पुष्टि आधिकारिक दिशा-निर्देशों से करना जरूरी है। इन उदाहरणों का अर्थ यह नहीं है कि हर दुकानदार या ग्राहक से इतनी रकम वसूली जाएगी।

दुकानदारों को क्या करना चाहिए?

MDR से जुड़े नियमों में बदलाव की स्थिति स्पष्ट होने तक व्यापारियों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • बैंक से जानकारी लें: अपने बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर से लागू होने वाली तारीख और संभावित शुल्क की पुष्टि करें।
  • मर्चेंट कैटेगरी समझें: यह पता करें कि उनका कारोबार प्रस्तावित नियमों के दायरे में आता है या नहीं।
  • सेटलमेंट स्टेटमेंट जांचें: भुगतान से संबंधित शुल्क और बैंक से मिलने वाले स्टेटमेंट पर नजर रखें।
  • आधिकारिक सर्कुलर का इंतजार करें: केवल खबरों या अनुमानों के आधार पर अपने भुगतान सिस्टम में बदलाव न करें।

क्या ग्राहकों को UPI भुगतान के लिए अतिरिक्त पैसे देने होंगे?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि हर UPI भुगतान पर नया शुल्क लगेगा। ग्राहकों को किसी भी संभावित बदलाव के बारे में आधिकारिक घोषणा और लागू नियमों के आधार पर ही जानकारी लेनी चाहिए।

दुकान पर भुगतान करते समय स्क्रीन पर दिखाई देने वाली राशि और किसी अतिरिक्त शुल्क की जानकारी ध्यान से देखना भी उपयोगी है।

आधिकारिक घोषणा पर रहेगी नजर

NPCI के नोटिस के हवाले से सामने आई जानकारी में चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए समयसीमा आगे बढ़ने की बात कही गई है। नई तारीख, पात्र ट्रांजैक्शन, शुल्क की दर और छूट से संबंधित अंतिम स्थिति जानने के लिए आधिकारिक सर्कुलर की पुष्टि जरूरी है।

BHARATSUPERFASTNEWS

Read more

Local News