Monday, October 12, 2026

जंतर-मंतर के प्रदर्शनों से 2,000 करोड़ का कारोबार ठप होने का दावा, व्यापारियों ने फैसले का किया स्वागत.

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नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026। राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनों और धरनों के लिए जंतर-मंतर को निर्धारित स्थलों की सूची से हटाए जाने के फैसले का व्यापारिक संगठनों ने स्वागत किया है। व्यापारियों का कहना है कि शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में बार-बार होने वाले प्रदर्शनों और यातायात संबंधी बाधाओं से कारोबार प्रभावित होता है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दावा किया है कि हालिया विरोध प्रदर्शनों के कारण दिल्ली में करीब 2,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।

दूसरी ओर, नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने भी इस फैसले को व्यावहारिक बताते हुए कहा है कि इससे कनॉट प्लेस, जनपथ और आसपास के इलाकों में कारोबार करने वाले दुकानदारों तथा आम लोगों को होने वाली परेशानी कम हो सकती है।

जंतर-मंतर की जगह अब कहां होंगे प्रदर्शन?

रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को जारी आदेश में प्रदर्शनों और धरनों के लिए वैकल्पिक स्थानों के रूप में रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान का नाम घोषित किया है।

इस फैसले के बाद व्यापारिक संगठनों को उम्मीद है कि राजधानी के प्रमुख बाजारों में यातायात और ग्राहकों की आवाजाही पर पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है।

व्यापारियों का कहना है कि प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार हैं, लेकिन इनके आयोजन की जगह ऐसी होनी चाहिए जहां विरोध दर्ज कराने के साथ-साथ बाजारों, दुकानों और आम लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर कम से कम असर पड़े।

कनॉट प्लेस और जनपथ के कारोबार पर पड़ा असर

दिल्ली के कनॉट प्लेस और जनपथ जैसे प्रमुख बाजारों में त्योहारों के दौरान आम तौर पर ग्राहकों की अच्छी-खासी भीड़ रहती है। नवरात्रि और दिवाली से पहले का समय कपड़ों, फुटवियर, ज्वेलरी, रेस्टोरेंट और अन्य खुदरा कारोबार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

लेकिन व्यापारियों का दावा है कि हालिया प्रदर्शनों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की संख्या काफी घट गई। कुछ दुकानदारों ने यह भी कहा कि बाजार दोबारा खुलने के बाद भी सामान्य रौनक लौटती नहीं दिखी।

नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव अमित गुप्ता के मुताबिक, प्रदर्शन के कारण मेट्रो सेवाओं और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले रास्तों पर आई बाधाओं से आम लोगों को परेशानी हुई। उनका दावा है कि इससे दुकानों, रेस्टोरेंट, दफ्तरों और बैंकों की व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।

वीकेंड में 100 करोड़ रुपये से अधिक नुकसान का दावा

NDTA के संयुक्त सचिव अमित गुप्ता ने अनुमान जताया कि शनिवार और रविवार के दौरान दुकानों, रेस्टोरेंट, दफ्तरों और बैंकों को मिलाकर 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

उन्होंने यह भी दावा किया कि कनॉट प्लेस के कारोबार को लगभग 150 से 200 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है।

हालांकि, ये आंकड़े व्यापारिक संगठन की ओर से लगाए गए अनुमान हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में इनकी स्वतंत्र पुष्टि करने वाला विस्तृत आर्थिक आकलन प्रस्तुत नहीं किया गया है।

व्यापारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान बाजारों में कम आवाजाही, रास्तों में बाधा और ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर चिंता ने बिक्री को प्रभावित किया।

दुकानदार बोले—त्योहारी सीजन में ग्राहक नहीं पहुंच रहे

जनपथ में लगभग चार दशक से दुकान चला रहीं दुकानदार नीरा कुकरेजा ने बताया कि बाजार खुलने के बावजूद ग्राहकों की संख्या सामान्य से काफी कम दिखाई दी।

उनके मुताबिक, आम तौर पर नवरात्रि के दौरान जनपथ में अच्छी भीड़ रहती है, लेकिन इस बार ग्राहकों की कमी से दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने आशंका जताई कि अगर बिक्री कम रही तो कारोबारियों के लिए आर्थिक नुकसान की भरपाई करना मुश्किल होगा।

नीरा कुकरेजा ने यह भी कहा कि व्यापारियों के सामने कीमतें बढ़ाने का विकल्प आसान नहीं है, क्योंकि इससे ग्राहक खरीदारी से पीछे हट सकते हैं।

जनपथ में फुटवियर की दुकान चलाने वाले सुनील गर्ग ने भी ग्राहकों की संख्या में कमी की बात कही। उनके अनुसार, बाजार खुलने के बाद भी नवरात्रि और दिवाली से पहले जैसी भीड़ नहीं दिखाई दी। उन्होंने भीड़ में लगभग 60 प्रतिशत तक गिरावट का अनुमान जताया।

ये आंकड़े संबंधित दुकानदारों के व्यक्तिगत अनुभव और अनुमानों पर आधारित हैं, न कि पूरे बाजार का आधिकारिक सर्वेक्षण।

सुरक्षा की चिंता से भी खरीदारी प्रभावित

रिपोर्ट में खरीदारी के लिए जनपथ पहुंचीं कुछ महिलाओं और छात्राओं ने भी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। एक छात्रा ने बताया कि डांडिया कार्यक्रम के लिए कपड़े खरीदने आने पर उसके माता-पिता लगातार फोन करके उसकी सुरक्षा का हाल पूछ रहे थे।

एक अन्य छात्रा ने कहा कि शादी के लिए ज्वेलरी खरीदने बाजार पहुंचने पर उसे सामान्य दिनों की तुलना में कम भीड़ दिखाई दी।

व्यापारियों का मानना है कि जब किसी इलाके में प्रदर्शन, रास्तों पर प्रतिबंध या सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनती है, तो ग्राहक वहां जाने से बच सकते हैं। इससे बाजार की बिक्री पर असर पड़ सकता है।

CTI का बड़ा दावा: दिल्ली में 2,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर बाजारों और दुकानदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान कुछ इलाकों में व्यापारियों को दुकानें बंद रखने के निर्देश दिए गए। उन्होंने दावा किया कि कई जगह पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव के कारण बाजारों में कारोबार प्रभावित हुआ।

संगठन के मुताबिक, इस वजह से दिल्ली में करीब 2,000 करोड़ रुपये का कारोबार ठप या प्रभावित हुआ। CTI ने पुलिस प्रशासन से आग्रह किया है कि व्यापारियों को बिना डर के दुकानें खोलने और कारोबार करने का अवसर दिया जाए।

महत्वपूर्ण बात: 2,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा CTI का दावा है। इसे प्रमाणित सरकारी नुकसान या स्वतंत्र रूप से सत्यापित आर्थिक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए, जब तक इसकी पुष्टि के लिए विस्तृत आकलन सामने न आए।

दिवाली तक बाजार बंद नहीं करने की व्यापारियों की घोषणा

CTI के महासचिव रमेश आहूजा और उपाध्यक्ष राहुल अदलखा ने कहा कि दिवाली से पहले का समय व्यापारियों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी दौर में से एक है।

उनका कहना है कि व्यापारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन विरोध प्रदर्शनों के कारण बाजारों का कारोबार बाधित नहीं होना चाहिए।

संगठन ने दिवाली तक बाजारों को बंद रखने की स्थिति से बचने और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

व्यापारियों की मांग है कि प्रदर्शन के लिए तय स्थानों पर पर्याप्त व्यवस्था की जाए, ताकि विरोध करने वालों के अधिकारों और आम लोगों तथा कारोबारियों की जरूरतों के बीच संतुलन बना रहे।

विपक्ष का आंदोलन भी जारी

इसी बीच, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों का विरोध भी जारी रहने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को ‘इंडिया’ गठबंधन से जुड़े नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। इस मार्च में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ प्रियंका गांधी सहित अन्य विपक्षी नेताओं की भागीदारी का उल्लेख किया गया है।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आंदोलन जारी रखने की बात कही। रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी और अन्य संगठनों की ओर से भी विरोध प्रदर्शनों का जिक्र है।

इन प्रदर्शनों का मुख्य मुद्दा एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए जा रहे सवाल हैं। विपक्षी दलों की मांगों और आरोपों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं की पुष्टि अलग से की जानी चाहिए।

व्यापार और लोकतांत्रिक विरोध के बीच संतुलन की मांग

जंतर-मंतर को प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाने के फैसले ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के स्थान और बाजारों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

व्यापारिक संगठनों का तर्क है कि बाजारों में सामान्य गतिविधियां जारी रहनी चाहिए और दुकानदारों को सुरक्षा के साथ काम करने का अवसर मिलना चाहिए। वहीं, प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगें रखने का एक माध्यम हैं।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों की व्यवस्था लागू होने के बाद बाजारों में यातायात, ग्राहकों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों पर कितना असर पड़ता है।

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