Monday, October 5, 2026

भाजपा में टिकट को लेकर चार नाम चर्चा में, पीरटांड़ का समीकरण भी अहम.

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रांची/गिरिडीह: गिरिडीह विधानसभा सीट पर प्रस्तावित उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर भाजपा के भीतर संभावित प्रत्याशी को लेकर मंथन शुरू हो गया है। पार्टी स्तर पर स्थानीय कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने की प्रक्रिया के बीच चार नामों की चर्चा प्रमुखता से हो रही है।

इनमें निर्भय शाहाबादी, सुरेश साव, रवींद्र राय और चुन्नू कांत के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इनमें से किसी नाम पर भाजपा की ओर से आधिकारिक तौर पर प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है।

पीरटांड़ पर भाजपा का खास फोकस

गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में गिरिडीह सदर और पीरटांड़ प्रखंड शामिल हैं। राजनीतिक समीकरण में दोनों क्षेत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शहरी इलाके में भाजपा का संगठन और जनाधार मजबूत माना जाता है, जबकि पीरटांड़ में पार्टी को अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा है।

इसी वजह से संभावित उम्मीदवारों की चर्चा में पीरटांड़ क्षेत्र में उनकी सक्रियता और जनसंपर्क को भी महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं के स्तर पर ऐसे नामों को लेकर चर्चा है, जिनकी इस क्षेत्र में भी पकड़ और संगठनात्मक सक्रियता हो।

निर्भय शाहाबादी और सुरेश साव के नाम पर चर्चा

निर्भय शाहाबादी पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार रहे थे। उपलब्ध चुनावी संदर्भ के अनुसार वह सुदिव्य कुमार से लगभग 3,500 मतों के अंतर से पीछे रहे थे। शाहाबादी वैश्य समाज से आते हैं और भाजपा के शहरी आधार के बीच उनकी सक्रियता रही है। हालांकि, उम्र को लेकर भी पार्टी के अंदर चर्चा होने की बात सामने आ रही है।

वहीं सुरेश साव भाजपा के युवा नेताओं में शामिल हैं। वह वैश्य समाज से आते हैं और धनबाद लोकसभा क्षेत्र में पार्टी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों से पीरटांड़ के संताल बहुल इलाकों में उनकी सक्रियता की चर्चा होती रही है। हाल के दिनों में उनके द्वारा संताल समाज के लोगों को भाजपा से जोड़ने की गतिविधियां भी सामने आई हैं।

रवींद्र राय और चुन्नू कांत भी दावेदारों में

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की चर्चा में है। वह गिरिडीह जिले के निवासी हैं और राजधनवार विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। भूमिहार समाज से आने वाले राय का पार्टी संगठन में लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है।

गिरिडीह क्षेत्र में ब्राह्मण और भूमिहार मतदाताओं की मौजूदगी को देखते हुए उनके नाम को भी राजनीतिक समीकरण के लिहाज से देखा जा रहा है।

इसके अलावा चुन्नू कांत का नाम भी पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा में बताया जा रहा है। वह कायस्थ समाज से आते हैं और स्थानीय स्तर पर लगातार जनसंपर्क में रहने के कारण उनके नाम पर भी विचार की चर्चा है।

अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व करेगा

गिरिडीह उपचुनाव के लिए भाजपा का अंतिम उम्मीदवार कौन होगा, यह पार्टी नेतृत्व के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल स्थानीय सक्रियता, संगठन में स्वीकार्यता, क्षेत्रीय समीकरण और खासकर पीरटांड़ में प्रभाव जैसे पहलुओं को लेकर संभावित नामों पर चर्चा चल रही है।

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