Ganga Path Project: बिहार में गंगा किनारे सड़क संपर्क को मजबूत करने की दिशा में तीन नई परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित तीनों गंगा पथों की कुल लंबाई करीब 219 किलोमीटर होगी। फिलहाल इन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। रिपोर्ट पूरी होने के बाद टेंडर जारी कर निर्माण एजेंसी का चयन किया जाएगा।
नए साल में शुरू हो सकता है निर्माण
इन तीनों सड़क परियोजनाओं के लिए सेलेक्शन कंसल्टेंट ने काम शुरू कर दिया है। संबंधित एजेंसी को करीब तीन महीने के भीतर DPR तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके बाद परियोजनाओं की लागत, अंतिम एलाइनमेंट और अन्य तकनीकी पहलुओं के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी।
सरकार ने इन सड़कों की योजना बनाते समय आने वाले करीब 25 वर्षों में बढ़ने वाले यातायात दबाव को भी ध्यान में रखा है। इसी आधार पर इन मार्गों की क्षमता और जरूरत का आकलन किया जा रहा है।
कौन-कौन से गंगा पथ बनेंगे?
प्रस्तावित तीन परियोजनाओं में अलग-अलग इलाकों को गंगा के किनारे बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने की योजना है।
1. बक्सर-कोइलवर गंगा पथ
बक्सर से कोइलवर के बीच करीब 90 किलोमीटर लंबी सड़क प्रस्तावित है। इस परियोजना को विश्वामित्र पथ नाम दिया गया है और इसकी मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है।
2. बिदुपुर-दिघवारा गंगा पथ
बिदुपुर से दिघवारा के बीच गंगा किनारे लगभग 56 किलोमीटर सड़क बनाई जाएगी। इससे इस क्षेत्र में सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।
3. कोन्हुआ-डुमरिया घाट गंगा पथ
कोन्हुआ से डुमरिया घाट के बीच करीब 73 किलोमीटर लंबा मार्ग विकसित किया जाना है। इसे नारायणी पथ के नाम से जाना जाएगा।
पटना से बक्सर और यूपी तक कनेक्टिविटी पर असर
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कई प्रमुख इलाकों के बीच आवागमन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। बिदुपुर-दिघवारा मार्ग से पटना की ओर से बक्सर तक सड़क संपर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वहीं, कोन्हुआ से डुमरिया घाट तक बनने वाला गंगा पथ बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन को आसान बनाने में उपयोगी हो सकता है। नए मार्गों से मौजूदा सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने का भी लक्ष्य है।
DPR में किन बातों का होगा आकलन?
DPR तैयार करते समय सिर्फ सड़क का निर्माण खर्च ही नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को भी शामिल किया जाएगा। प्रारंभिक एलाइनमेंट पहले से तय है, लेकिन अब अंतिम एलाइनमेंट को DPR में निर्धारित किया जाना है।
रिपोर्ट में मुख्य रूप से इन पहलुओं का आकलन किया जाएगा:
- सड़क का अंतिम एलाइनमेंट
- निर्माण में आने वाली अनुमानित लागत
- वर्तमान यातायात दबाव
- अगले 25 वर्षों में संभावित ट्रैफिक
- सड़क की भविष्य की क्षमता
- टोल व्यवस्था लागू होने पर संभावित राजस्व
तीनों परियोजनाओं की निगरानी और निर्माण संबंधी प्रक्रिया बिहार राज्य पथ निर्माण विकास निगम के स्तर से की जाएगी। DPR और टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।
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