महाराजगंज (सीवान): संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से मनाया जाने वाला जिउतिया पर्व शुक्रवार से शुरू हो गया। महाराजगंज क्षेत्र में महिलाओं ने पर्व के पहले दिन परंपरागत रूप से नहाय-खाय किया और पूजा-अर्चना के बाद सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत की तैयारी शुरू की।
सुबह से घरों में दिखा धार्मिक उत्साह
जिउतिया को लेकर सुबह से ही कई घरों में उत्साह का माहौल रहा। व्रत करने वाली महिलाओं ने स्नान के बाद पूजा की और परिवार की सुख-शांति तथा संतान की दीर्घायु की कामना की। नहाय-खाय की रस्म पूरी होने के बाद अब महिलाएं अगले चरण के व्रत की तैयारियों में जुट गई हैं।
जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी प्रसिद्ध
जिउतिया पर्व को जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। यह माताओं की आस्था से जुड़ा प्रमुख पर्व है। धार्मिक परंपरा के अनुसार महिलाएं संतान के स्वस्थ, दीर्घ और सुखमय जीवन की कामना के लिए यह व्रत करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी पारंपरिक विधियां आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जाती हैं।
पूजा सामग्री की खरीदारी से बाजार गुलजार
पर्व की शुरुआत के साथ महाराजगंज के बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई। महिलाओं और परिवारों ने पूजा के लिए जरूरी सामग्री, फल, सब्जियां और अन्य सामान की खरीदारी की। पर्व को देखते हुए दुकानदारों ने भी अपनी दुकानों पर आवश्यक सामग्री का पर्याप्त इंतजाम किया।
भगवान जीमूतवाहन की पूजा की परंपरा
पंडित रासबिहारी उपाध्याय के अनुसार, जिउतिया व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। व्रती महिलाएं स्नान के बाद पितरों का स्मरण करती हैं और निर्धारित परंपराओं के अनुसार पूजा-व्रत की प्रक्रिया आगे बढ़ाती हैं।
कई स्थानों पर महिलाएं आंगन में गोबर से पोखर या नदी का प्रतीक बनाकर उसमें पाकड़ की डाली स्थापित करती हैं। इसके बाद भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। पर्व के दौरान भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों से घरों में भक्तिमय वातावरण बना रहता है।
आस्था और परंपरा का पर्व
जिउतिया केवल व्रत का अवसर नहीं, बल्कि परिवार और समाज से जुड़ी पारंपरिक आस्था का भी पर्व है। नहाय-खाय के साथ शुरू हुई तैयारियों के बाद व्रती महिलाएं आगे की पूजा-विधि के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने में लगी हैं।
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