Thursday, October 1, 2026

स्वच्छ भारत मिशन में तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल, AI रोबोट और EV से आधुनिक हो रही सफाई व्यवस्था.

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नई दिल्ली: स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश के कई शहर अब सफाई और कचरा प्रबंधन को पारंपरिक तरीकों से आगे ले जाकर तकनीक आधारित व्यवस्था अपना रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल से सफाई व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है।

2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत मिशन की वर्षगांठ के अवसर पर सामने आए उदाहरण बताते हैं कि शहरी निकाय सफाई कर्मचारियों के जोखिम को कम करने और प्रदूषण घटाने के लिए नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रहे हैं।

रायपुर में ऑनलाइन बुक हो रही सेप्टिक टैंक सफाई

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए डिजिटल सुविधा शुरू की गई है। नगर निगम ने राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन के तहत UPYOG प्लेटफॉर्म से जुड़े फीकल स्लज मैनेजमेंट (FSM) डैशबोर्ड का इस्तेमाल शुरू किया है।

इसके जरिए नागरिक मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से सेप्टिक टैंक सफाई की बुकिंग कर सकते हैं और डिजिटल भुगतान की सुविधा भी ले सकते हैं। काम पूरा होने के बाद संबंधित वाहन चालक द्वारा तस्वीरें अपलोड किए जाने से पूरी प्रक्रिया की निगरानी और रिकॉर्ड रखना आसान होता है।

तिरुवनंतपुरम में नहर की सफाई कर रहा रोबोट

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में नहरों की सफाई के लिए रोबोटिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। अमायिझंचन नहर में G-SPIDER नामक रोबोट को सफाई कार्य में लगाया गया है।

मशीन विजन और सेंसर तकनीक से लैस यह रोबोट पानी के बीच मौजूद कचरे की पहचान कर उसे बाहर निकालने में मदद करता है। इसके मैकेनिकल सिस्टम के जरिए ऐसे स्थानों पर सफाई की जा सकती है, जहां कर्मचारियों के लिए काम करना जोखिम भरा हो सकता है।

इस तरह की तकनीक का एक उद्देश्य सफाई कर्मियों को दूषित पानी और संभावित हानिकारक परिस्थितियों के सीधे संपर्क से बचाना भी है।

ई-वाहनों से कचरा संग्रहण में बदलाव

कचरा उठाने और घर-घर संग्रहण के लिए कई शहर डीजल वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं।

गुंटूर: शहर में 200 से अधिक इलेक्ट्रिक ऑटो कचरा संग्रहण के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इनमें GPS ट्रैकिंग की सुविधा भी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस व्यवस्था से सालाना करीब 71 हजार लीटर डीजल की बचत का दावा किया गया है।

चेन्नई: ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन ने अपने 15 जोन में 5,478 बैटरी चालित ई-रिक्शा तैनात किए हैं। ये वाहन घर-घर कचरा संग्रहण में लगाए गए हैं और रोजाना करीब 40 किलोमीटर तक चलते हैं।

इंदौर: स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके इंदौर में भी इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। शहर के प्रमुख क्षेत्रों में लगाए गए वाहनों की निगरानी और रूट मैपिंग इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिए की जाती है।

सफाई व्यवस्था में डिजिटल निगरानी पर जोर

तकनीक के इस्तेमाल से नगर निकायों को केवल कचरा उठाने तक सीमित नहीं रहना पड़ रहा है, बल्कि वाहनों की लोकेशन, सफाई कार्य की स्थिति और सेवा पूरी होने का रिकॉर्ड भी डिजिटल तरीके से रखने में मदद मिल रही है।

AI और रोबोटिक्स का इस्तेमाल विशेष रूप से उन कार्यों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनमें कर्मचारियों को जोखिम वाले स्थानों पर जाना पड़ता है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों से ईंधन की खपत और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत डिजिटल तकनीक, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का यह विस्तार आने वाले समय में शहरी स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

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