नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026: अचानक दिल की धड़कन तेज होना, सांस फूलना या घबराहट महसूस होना कई बार तनाव और एंग्जायटी से जुड़ा हो सकता है। लेकिन कुछ मामलों में ऐसे लक्षण हार्ट एरिथमिया (Arrhythmia) यानी दिल की धड़कन की लय में गड़बड़ी का संकेत भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, दोनों स्थितियों के लक्षण काफी मिलते-जुलते होने के कारण अंतर समझना हमेशा आसान नहीं होता।
एंग्जायटी जैसे लक्षण दे सकती है एरिथमिया
जयपुर स्थित सीके बिरला हॉस्पिटल्स के कार्डियोलॉजी एवं इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी विभाग के सलाहकार डॉ. शुभम शर्मा के अनुसार, हार्ट रिदम की गड़बड़ी में तेज धड़कन के साथ सांस लेने में परेशानी, चक्कर, पसीना, सीने में असहजता और घबराहट जैसे लक्षण हो सकते हैं।
एरिथमिया केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। कुछ प्रकार की हार्ट रिदम समस्याएं कम उम्र के ऐसे लोगों में भी देखी जा सकती हैं जो सामान्य तौर पर स्वस्थ नजर आते हैं।
एंग्जायटी और एरिथमिया में क्या अंतर है?
एंग्जायटी में शरीर का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है। इसके कारण स्ट्रेस हार्मोन बढ़ने से कुछ समय के लिए दिल की धड़कन और सांस लेने की गति बढ़ सकती है। इसके साथ डर, बेचैनी, पसीना, चक्कर और तनाव जैसे लक्षण भी महसूस हो सकते हैं।
वहीं एरिथमिया में दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नल में गड़बड़ी होती है। इसके कारण दिल बहुत तेज, बहुत धीमा या अनियमित तरीके से धड़क सकता है।
कुछ एरिथमिया में व्यक्ति को दिल के फड़फड़ाने, तेज धड़कने, कमजोरी, चक्कर, सांस फूलने या सीने में परेशानी का अनुभव हो सकता है।
किन परिस्थितियों में डॉक्टर से संपर्क जरूरी?
हर बार दिल की धड़कन तेज होना किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। फिर भी अगर धड़कन से जुड़ी समस्या बार-बार हो रही है या उसके साथ दूसरे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी हो सकता है।
खास तौर पर ध्यान दें अगर:
- धड़कन अचानक शुरू होकर बार-बार रुकती हो
- बिना किसी स्पष्ट कारण के दिल बहुत तेज धड़कने लगे
- चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस हो
- सांस लेने में परेशानी हो
- सीने में दर्द या दबाव महसूस हो
- धड़कन की वजह से नींद खुल जाए
- व्यायाम के दौरान ऐसी समस्या हो
- परिवार में अचानक कार्डियक डेथ या जन्मजात हार्ट रिदम समस्या का इतिहास रहा हो
इनमें से कोई लक्षण होने का मतलब यह जरूरी नहीं कि एरिथमिया ही है, लेकिन सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
सामान्य ECG आने पर भी समस्या छिपी हो सकती है
एरिथमिया की पहचान में एक चुनौती यह है कि अगर जांच उस समय की जाए जब लक्षण मौजूद नहीं हैं, तो रूटीन ECG सामान्य आ सकता है। इसका मतलब हमेशा यह नहीं होता कि बीच-बीच में होने वाली हार्ट रिदम समस्या मौजूद नहीं है।
ऐसे मामलों में डॉक्टर स्थिति के अनुसार लंबे समय तक हृदय की निगरानी की सलाह दे सकते हैं। इसके लिए होल्टर मॉनिटर, इवेंट रिकॉर्डर या पैच मॉनिटर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ मामलों में पहनने योग्य डिवाइस भी हृदय की धड़कन रिकॉर्ड करने में मदद कर सकते हैं।
सही जांच से पता चल सकता है असली कारण
तेज धड़कन और घबराहट के लक्षण कई अलग-अलग कारणों से हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर इसे एंग्जायटी या एरिथमिया मान लेना उचित नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, लक्षणों का पैटर्न और उनकी अवधि नोट करना डॉक्टर के लिए उपयोगी हो सकता है। जरूरत पड़ने पर ECG या अन्य हार्ट मॉनिटरिंग जांच से समस्या का कारण समझने में मदद मिलती है।
जरूरी बात: अचानक या गंभीर सीने में दर्द, सांस लेने में अत्यधिक परेशानी, बेहोशी या गंभीर कमजोरी जैसे लक्षण हों तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है; व्यक्तिगत निदान या इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
