नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी के बजाय सीमित कदम उठा सकता है। ब्रोकरेज फर्म नोमुरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, RBI अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों में रेपो रेट में 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, केंद्रीय बैंक केवल एक बार दर बढ़ाकर आगे बढ़ोतरी रोक भी सकता है।
1.25% बढ़ोतरी की आशंका के बीच सीमित बदलाव का अनुमान
बाजार में पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए RBI ब्याज दरों में 1.25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकता है। नोमुरा के विश्लेषण के अनुसार, इसकी संभावना कम है और करीब 80 प्रतिशत संभावना है कि केंद्रीय बैंक सीमित स्तर पर ही दरों में बदलाव करेगा।
अगर अक्टूबर और दिसंबर में 0.25-0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो रेपो रेट 5.75 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। वहीं, एक ही बढ़ोतरी के बाद दरों को स्थिर रखने की संभावना से भी रिपोर्ट इनकार नहीं करती।
फरवरी 2027 के बाद दरों में बढ़ोतरी पर लग सकता है विराम
नोमुरा का अनुमान है कि फरवरी 2027 के बाद ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला थम सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, तब तक महंगाई की स्थिति में सुधार और घरेलू मांग के सामान्य स्तर पर आने की उम्मीद है।
इसका असर कर्ज की ब्याज दरों और EMI पर भी पड़ सकता है, हालांकि वास्तविक असर बैंक और अन्य ऋणदाताओं की दरों में बदलाव पर निर्भर करेगा।
कोर महंगाई में आई कमी
नोमुरा के मुताबिक, मौजूदा महंगाई का स्वरूप 2016-17 की स्थिति से अलग है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोर इन्फ्लेशन में कमी आई है और यह करीब 5 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत तक आ गई है।
फिलहाल खाद्य महंगाई चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई है। सब्जियों और दालों जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर आपूर्ति की स्थिति का असर पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति में सुधार होने पर खाद्य महंगाई में भी कमी आ सकती है।
2027 तक महंगाई में और कमी का अनुमान
नोमुरा ने आने वाले समय में खुदरा महंगाई को लेकर भी अनुमान जारी किया है।
- 2027 की शुरुआत: कुल खुदरा महंगाई करीब 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान।
- 2027 के आखिरी महीनों में: महंगाई 4 प्रतिशत के स्तर से नीचे आने का अनुमान।
- वित्त वर्ष 2026-27: औसत महंगाई करीब 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान।
- वित्त वर्ष 2027-28: औसत महंगाई घटकर करीब 4 प्रतिशत रह सकती है।
नोमुरा के ये आंकड़े अनुमान हैं। वास्तविक महंगाई और RBI की ब्याज दर संबंधी नीतियां खाद्य कीमतों, वैश्विक परिस्थितियों, घरेलू मांग और अन्य आर्थिक कारकों पर निर्भर करेंगी।
