पटना: बिहार में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने चुनाव को लेकर अहम जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि राज्य में पंचायत चुनाव नए परिसीमन के बाद ही कराए जाएंगे। पंचायतों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण का काम राज्य निर्वाचन आयोग की निगरानी में चल रहा है। आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 2026 के परिसीमन में 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है और इससे जुड़ी प्रक्रिया सितंबर में भी जारी रही है।
पांच साल के विकास का लिया जाएगा हिसाब
ग्राम संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत चुनाव के बाद जनप्रतिनिधियों से उनके क्षेत्र के पिछले पांच वर्षों के विकास का हिसाब लिया जाएगा। उन्होंने विकास और आर्थिक गतिविधियों के आधार पर सवाल पूछे जाने की बात कही।
सम्राट चौधरी के मुताबिक जिला परिषद, पंचायत समिति, प्रखंड प्रमुख और ग्राम पंचायत स्तर के प्रतिनिधियों से यह जानने की कोशिश होगी कि उनके क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में कितना बदलाव आया और विकास की गति कैसी रही।
बिहार सरकार के आर्थिक आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में राज्य का GSDP मौजूदा कीमतों पर करीब 9.92 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।
परिसीमन के बाद बदलेगा पंचायतों का स्वरूप
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई पंचायतें आबादी और भौगोलिक क्षेत्रफल के लिहाज से काफी बड़ी हैं। ऐसे में पंचायतों की सीमाओं को नए सिरे से व्यवस्थित करने की जरूरत है।
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या में बदलाव और नगर निकायों के विस्तार जैसी परिस्थितियों के कारण ग्राम पंचायत, वार्ड, पंचायत समिति और जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना है। आयोग की जानकारी में सामान्य क्षेत्र के लिए ग्राम पंचायत की मानक आबादी करीब 7,000 बताई गई है।
अपने गांव का उदाहरण भी दिया
मुख्यमंत्री ने अपने गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां करीब 20 हजार की आबादी होने के बावजूद आसपास के कई गांव उसी पंचायत का हिस्सा हैं। उन्होंने इसी तरह के उदाहरणों का हवाला देते हुए पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन की आवश्यकता बताई।
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर 2026 पंचायत परिसीमन से संबंधित अधिसूचनाएं और निर्देश उपलब्ध हैं। सितंबर में भी राजस्व गांव, जनगणना ब्लॉक और GIS मैप से जुड़ी त्रुटियों के सुधार के लिए आयोग की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं।
मुखिया की भूमिका पर सीएम ने क्या कहा?
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों की जमीनी भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि गांव के स्तर पर मुखिया के पास बड़ी संख्या में जिम्मेदारियां होती हैं और स्थानीय चुनावों में सामाजिक संबंधों और स्थानीय समीकरणों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत स्तर का चुनाव लोकतंत्र की जमीनी तस्वीर को सामने लाता है। उनके अनुसार निचले स्तर पर चुनाव में व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय भागीदारी काफी महत्वपूर्ण होती है।
पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने पंचायतों की आय बढ़ाने की जरूरत पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों पर अतिरिक्त कर का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए, लेकिन पंचायत क्षेत्र में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों से नियमानुसार राजस्व जुटाया जा सकता है।
उन्होंने ईंट-भट्ठा, निजी स्कूल और मोबाइल टावर जैसी व्यावसायिक गतिविधियों का उदाहरण दिया। इससे पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों के लिए संसाधन जुटाने की बात कही गई।
पंचायत सरकार भवन को मजबूत करने की तैयारी
पंचायत सरकार भवनों को बेहतर तरीके से विकसित करने की योजना पर भी सरकार की ओर से जोर दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध हो सकें और पंचायत प्रतिनिधियों तथा संबंधित कर्मियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जा सके।
बिहार में पंचायत आम निर्वाचन 2026 से संबंधित प्रक्रियाएं राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर जारी हैं। परिसीमन और अन्य चुनावी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम को लेकर आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
