Sunday, September 20, 2026

झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर हाईकोर्ट की नजर, RIMS से ब्लड और एंबुलेंस तक कई मामले.

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रांची: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले फिलहाल झारखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं। इन मामलों में रिम्स की बुनियादी सुविधाओं और जमीन से लेकर रक्त की उपलब्धता, कथित संक्रमित रक्त चढ़ाने, बर्न यूनिट, 108 एंबुलेंस सेवा और जैव चिकित्सा कचरे के निपटारे तक के मुद्दे शामिल हैं। अलग-अलग जनहित याचिकाओं और मामलों की सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार तथा संबंधित संस्थानों से रिपोर्ट और अनुपालन की जानकारी मांगी है।

RIMS की सुविधाओं और जमीन से जुड़ा मामला

रिम्स से संबंधित प्रमुख मामला W.P. (PIL) No. 4736 of 2018, ज्योति शर्मा बनाम झारखंड सरकार है। इसमें अस्पताल की आधारभूत सुविधाओं, कर्मचारियों, चिकित्सा उपकरणों, जांच व्यवस्था और परिसर की जमीन से जुड़े विषय उठाए गए हैं।

नवंबर 2025 में हाईकोर्ट ने रिम्स परिसर में अतिक्रमण और जमीन के रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी मांगी थी। इसके बाद 26 और 27 नवंबर को झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव ने रिम्स परिसर का निरीक्षण किया। निरीक्षण रिपोर्ट में विभिन्न मौजा की जमीन और अतिक्रमण की स्थिति का उल्लेख किया गया।

अदालत में रिम्स की जांच सुविधाओं को लेकर भी जानकारी रखी गई। अस्पताल प्रबंधन ने पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री सहित विभिन्न जांचों की उपलब्धता बताई। वहीं एमआरआई, मैमोग्राफी, पोर्टेबल सीटी स्कैन और पेट स्कैन जैसे उपकरणों की खरीद प्रक्रिया की जानकारी भी अदालत के समक्ष रखी गई।

रक्त की उपलब्धता और स्वैच्छिक रक्तदान पर सुनवाई

झारखंड में रक्त की उपलब्धता और रक्तदान व्यवस्था को लेकर भी कई मामले हाईकोर्ट पहुंचे हैं। इनमें W.P. (PIL) No. 6062 of 2025, 2971 of 2020, 2413 of 2021 और 4688 of 2025 शामिल हैं।

इन मामलों में राष्ट्रीय रक्त नीति के अनुरूप स्वैच्छिक रक्तदान बढ़ाने और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर चर्चा हुई। सुनवाई के दौरान यह विषय भी सामने आया कि कई परिस्थितियों में मरीजों के परिजनों को स्वयं रक्तदाता की व्यवस्था करनी पड़ती है।

दिसंबर 2025 के आदेश में स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने, सभी जिलों में रक्त के विभिन्न घटक तैयार करने की सुविधा विकसित करने, शिकायतों के लिए व्यवस्था बनाने और ब्लड स्टोरेज सेंटरों के नियमित निरीक्षण जैसे विषयों पर निर्देश दिए गए थे। रक्त की उपलब्धता की जानकारी के लिए मोबाइल ऐप, वेबसाइट और टोल-फ्री नंबर जैसी सुविधाओं को लेकर भी निर्देश दिए गए।

चाईबासा में कथित संक्रमित रक्त चढ़ाने का मामला

चाईबासा में पांच नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को कथित तौर पर एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का मामला भी हाईकोर्ट पहुंचा। यह मामला W.P. (Cr.) No. 50 of 2026 के तहत दर्ज हुआ।

परिजनों की ओर से प्राथमिकी दर्ज कर जांच कराने की मांग की गई थी। 4 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। अप्रैल 2026 में अदालत ने जांच की प्रगति से संबंधित रिपोर्ट भी मांगी।

मामले में रक्त की जांच, ट्रांसफ्यूजन प्रक्रिया और कथित संक्रमण से जुड़े तथ्यों की जांच प्रमुख विषय हैं।

बर्न मरीजों के इलाज की सुविधाओं पर सवाल

जलने वाले मरीजों के इलाज से जुड़ा मामला W.P. (PIL) No. 920 of 2021, ओंकार विश्वकर्मा बनाम झारखंड सरकार है। इसकी शुरुआत हजारीबाग में मिट्टी तेल से हुई आग की घटना और उपचार व्यवस्था से जुड़े सवालों से हुई थी।

बाद में सुनवाई का दायरा पूरे राज्य में बर्न मरीजों के इलाज की स्थिति तक पहुंचा। बर्न यूनिट, प्रशिक्षित चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी, दवाइयों और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता जैसे मुद्दे भी इसमें शामिल हुए। 1 अप्रैल 2026 के फैसले में हाईकोर्ट ने राज्य में बर्न मरीजों के उपचार के लिए व्यवस्थित सुविधाओं को लेकर निर्देश दिए।

108 एंबुलेंस सेवा भी सुनवाई के दायरे में

108 एंबुलेंस सेवा से संबंधित सुनवाई के दौरान अगस्त 2025 में राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि राज्य में 510 एंबुलेंस हैं। इनमें करीब 430 परिचालन में थीं, जबकि 57 मरम्मत के लिए भेजी गई थीं। सरकार ने 30 नई एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस उपलब्ध कराने की योजना की भी जानकारी दी थी।

मामले में एंबुलेंस चालकों, सेवा में आने वाली बाधाओं और आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने जैसे विषयों पर सुनवाई हुई।

रांची सदर अस्पताल से जुड़े एक अलग स्वत: संज्ञान मामले में यातायात जाम और गलत तरीके से वाहनों की पार्किंग के कारण एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचने में परेशानी हुई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने ट्रैफिक पुलिस और रांची सिविल सर्जन को गंभीर मरीजों तथा एंबुलेंस के लिए रास्ता सुगम रखने को लेकर निर्देश दिए।

जैव चिकित्सा कचरे के निपटारे पर भी अदालत की निगरानी

अस्पतालों से निकलने वाले जैव चिकित्सा कचरे से जुड़ा मामला W.P. (PIL) No. 1385 of 2012, झारखंड ह्यूमन राइट्स कॉन्फ्रेंस बनाम झारखंड सरकार एवं अन्य है।

इस मामले में जैव चिकित्सा कचरे के संग्रह, परिवहन, उपचार और निपटारे की व्यवस्था पर सुनवाई हुई है। 26 फरवरी 2026 के आदेश में निगरानी व्यवस्था, जिलेवार आंकड़े तैयार करने, निरीक्षण और संबंधित नियमों के अनुपालन को लेकर निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य व्यवस्था के कई पहलुओं पर अदालत की निगरानी

रिम्स की आधारभूत सुविधाओं और जमीन से लेकर रक्त की उपलब्धता, कथित संक्रमित रक्त, बर्न मरीजों के इलाज, 108 एंबुलेंस और जैव चिकित्सा कचरे तक अलग-अलग मामलों में झारखंड हाईकोर्ट के समक्ष स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े प्रश्न पहुंचे हैं। इन मामलों में अदालत संबंधित विभागों और संस्थानों से रिपोर्ट तथा निर्देशों के अनुपालन की जानकारी ले रही है।

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