Friday, September 18, 2026

झारखंड में लंबित मुकदमों के निपटारे की कवायद तेज, 30 सितंबर तक चिन्हित होंगे समझौते योग्य मामले.

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रांची: झारखंड में लंबे समय से लंबित मुकदमों को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए ‘मेडिएशन फॉर द नेशन 3.0’ अभियान चलाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की मेडिएशन एंड कन्सिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी (एमसीपीसी) के 90 दिवसीय राष्ट्रीय अभियान के तहत ऐसे मामलों की पहचान की जाएगी, जिनमें दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना है।

इस पहल में हाईकोर्ट, जिला अदालतों, तालुका कोर्ट और ट्रिब्यूनल में लंबित मामलों को शामिल किया जाएगा।

30 सितंबर तक तैयार होगी मामलों की सूची

अभियान को लेकर झारखंड के प्रधान सचिव-सह-विधि परामर्शी नीरज कुमार श्रीवास्तव ने 1 सितंबर को राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस विभाग के आला अधिकारियों को पत्र भेजा है। इसमें झालसा के निर्देशों का हवाला देते हुए सभी संबंधित विभागों से कहा गया है कि वे 30 सितंबर 2026 तक समझौते योग्य लंबित मामलों की पहचान कर सूची उपलब्ध कराएं।

यह सूची झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के सदस्य सचिव को भेजी जाएगी। इसके आधार पर आगे मामलों को मध्यस्थता केंद्र भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी।

पहले होगी प्री-मेडिएशन स्क्रीनिंग

अभियान के तहत सबसे पहले लंबित मुकदमों की प्रारंभिक जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि किन मामलों का समाधान बातचीत और आपसी सहमति के जरिए संभव है।

इसके बाद संबंधित पक्षकारों को नोटिस या सूचना दी जाएगी। उपयुक्त मामलों को उनकी सहमति के आधार पर मेडिएशन सेंटर भेजा जाएगा। चिन्हित मामलों की जानकारी अदालतों, बार एसोसिएशन और संबंधित आधिकारिक वेबसाइटों पर प्रकाशित करने का भी प्रावधान रखा गया है।

किन मामलों को किया जा सकता है शामिल

मेडिएशन अभियान में विभिन्न प्रकार के दीवानी और समझौता योग्य विवादों को शामिल किया जा सकता है। इनमें प्रमुख हैं—

  • वैवाहिक और पारिवारिक विवाद
  • सड़क दुर्घटना से जुड़े दावा मामले
  • चेक बाउंस के प्रकरण
  • समझौता योग्य आपराधिक मामले
  • उपभोक्ता विवाद
  • कर्ज वसूली और सरफेसी से संबंधित मामले
  • डिक्री के निष्पादन से जुड़े विवाद
  • मध्यस्थता अधिनियम के तहत मामले
  • व्यावसायिक विवाद
  • सेवा संबंधी मामले
  • बंटवारा और बेदखली के मुकदमे
  • भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले
  • श्रम कानून से संबंधित विवाद
  • अन्य उपयुक्त दीवानी मामले

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से होगी मेडिएशन

पक्षकारों की सुविधा के अनुसार मध्यस्थता की प्रक्रिया ऑफलाइन, ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में कराई जा सकेगी। अभियान के दौरान सप्ताह के सभी सातों दिन मेडिएशन की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

ऑनलाइन प्रक्रिया में शामिल होने वाले पक्षकारों को भी अनुमति दी जाएगी। तालुका और जिला विधिक सेवा प्राधिकार ऐसे मामलों में तकनीकी और प्रक्रियागत सहायता उपलब्ध कराएंगे।

न्यायाधीशों के लिए आयोजित होगी ट्रेनिंग

अभियान के प्रभावी संचालन के लिए मेडिएशन कमेटी को राज्य के न्यायाधीशों के लिए रेफरल जज ट्रेनिंग आयोजित करने को कहा गया है। इसके अलावा मामलों के रेफरल, सफल और असफल मध्यस्थता तथा जिन मामलों में प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी, उनका भी मूल्यांकन किया जाएगा।

अभियान पूरा होने के 30 दिनों के भीतर इसकी विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट की एमसीपीसी को भेजी जाएगी।

एसओपी के तहत आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी के अनुसार अभियान के पहले चरण में लंबित मामलों की पहचान और प्री-मेडिएशन स्क्रीनिंग होगी। इसके बाद पक्षकारों को सूचना देकर उपयुक्त मुकदमों को मेडिएशन सेंटर भेजा जाएगा।

चिन्हित और रेफर किए गए मामलों से संबंधित आंकड़े निर्धारित प्रारूप में एमसीपीसी को उपलब्ध कराए जाएंगे। अभियान का उद्देश्य समझौते योग्य विवादों का शीघ्र समाधान कर अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या कम करना है।

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