कश्मीर के अलगाववादी नेता नईम अहमद खान ने जेल अधिकारियों द्वारा जारी किए गए कई परिपत्रों को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है
कश्मीर के अलगाववादी नेता नईम अहमद खान ने जेल अधिकारियों द्वारा जारी किए गए कई परिपत्रों को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्होंने मनमाने ढंग से उनकी फोन कॉल और ई-मुलाकात सुविधाएं वापस ले ली हैं। खान ने महानिदेशक (कारागार) द्वारा 2022 से 2024 के बीच जारी परिपत्रों की वैधता को चुनौती दी है। उनका दावा है कि ये निर्देश मनमाने हैं और दिल्ली कारागार अधिनियम का उल्लंघन करते हैं।
14 अगस्त, 2017 से न्यायिक हिरासत में चल रहे खान को 24 जुलाई, 2017 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत कश्मीर घाटी में अशांति पैदा करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 121 और 121ए के साथ-साथ यूएपीए के कई प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए।
इससे पहले भी टेरर फंडिग मामले में आरोपों का सामना कर रहे एक अलगाववादी ने अदालत से फोन कॉल सुविधा चालू किए जाने की मांग की थी। इसे अदालत ने यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि समाज की सुरक्षा की दृष्टिकोण से जेल प्रबंधन फोन कॉल या ई-मुलाकात की सुविधा रोक सकता है।



