गढ़वा। प्रधानमंत्री किफायती आवास योजना (शहरी) के तहत गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र में शुरू की गई आवास परियोजना करीब नौ साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। योजना के तहत 400 लाभुकों के लिए फ्लैट बनाए जाने थे, लेकिन अब तक एक भी लाभुक को आवास नहीं मिल पाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परियोजना पर अब तक 9.09 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
सोनपुरवा लाइन के उस पार महुराम टोला में निर्माणाधीन फ्लैटों का काम धीमी रफ्तार से चल रहा है। लंबे समय से घर मिलने की उम्मीद लगाए बैठे लाभुकों में इसे लेकर नाराजगी है।
किराया भी दे रहे, बैंक की किस्त भी
योजना में चयनित कुछ लाभुकों ने अपना अंशदान जमा करने के लिए बैंक से कर्ज लिया है। ऐसे परिवारों के सामने दोहरा आर्थिक बोझ है। उन्हें मौजूदा समय में किराये के मकान का खर्च उठाने के साथ बैंक ऋण की किस्त भी चुकानी पड़ रही है।
योजना के तहत लाभुकों को किफायती कीमत पर वन बीएचके फ्लैट उपलब्ध कराने की योजना थी।
400 में 64 फ्लैट अभी शुरुआती स्तर पर
इस परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी जुडको है। वर्ष 2017-18 में डीपीआर तैयार कर टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई थी और 2018-19 में निर्माण शुरू हुआ। परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत 25.84 करोड़ रुपये रखी गई थी।
400 प्रस्तावित फ्लैटों में से 64 का निर्माण अभी प्लिंथ स्तर पर ही है। वहीं 336 फ्लैटों का स्ट्रक्चर तैयार हो चुका है, लेकिन इनमें भी कई जरूरी काम बाकी हैं। प्लास्टर, पेंट, दरवाजे-खिड़कियां, विद्युत वायरिंग, पानी का कनेक्शन, शौचालय, किचन, फर्श और सीढ़ियों की रेलिंग जैसे कार्य अभी पूरे नहीं हुए हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार परियोजना की भौतिक प्रगति करीब 46 प्रतिशत और वित्तीय प्रगति 34.72 प्रतिशत बताई गई है। इसी आधार पर संवेदक को अब तक 9.09 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
एक फ्लैट की कीमत 6.46 लाख रुपये
योजना के तहत प्रत्येक फ्लैट की निर्धारित लागत 6.46 लाख रुपये है। इसमें लाभुक को 3.96 लाख रुपये का अंशदान करना है, जबकि शेष 2.50 लाख रुपये सरकारी अनुदान के रूप में मिलने हैं।
सरकारी सहायता में केंद्र की ओर से 1.50 लाख और राज्य सरकार की ओर से एक लाख रुपये शामिल हैं। लाभुकों को चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए शुरुआत में पांच हजार रुपये पंजीकरण राशि जमा करनी थी। यह रकम उनके कुल अंशदान में समायोजित की जानी थी।
लाभुकों का चयन लॉटरी के माध्यम से किया गया था और पूरी प्रक्रिया नगर परिषद की निगरानी में हुई।
निर्माण के चरण के हिसाब से जमा करनी थी राशि
लाभुकों के अंशदान को निर्माण की प्रगति से जोड़ा गया था। चयन के बाद पहली किस्त के तौर पर 20 हजार रुपये जमा करने थे। भवन निर्माण के 25 प्रतिशत स्तर तक पहुंचने पर 92,750 रुपये और आगे निर्माण बढ़ने के साथ निर्धारित अनुपात में शेष राशि जमा करनी थी।
कई लाभुक आर्थिक रूप से सक्षम नहीं थे, इसलिए उन्होंने बैंक से ऋण लेकर अंशदान जमा किया। जानकारी के मुताबिक करीब 114 लाभुक निर्माण की प्रगति के अनुसार अपना अंशदान जमा कर चुके हैं। दूसरी ओर, कुछ लाभुकों ने केवल पंजीकरण कराया और आगे की राशि जमा नहीं की। इससे भी परियोजना की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
पुराने प्राक्कलन ने बढ़ाई परेशानी
परियोजना शुरू हुए कई वर्ष बीतने के कारण निर्माण सामग्री और लागत में काफी बदलाव आया है। पुराने प्राक्कलन और मौजूदा निर्माण लागत के बीच अंतर बढ़ गया है।
बताया जा रहा है कि जुडको की ओर से प्राक्कलन में संशोधन किए जाने के बाद ही निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की स्थिति स्पष्ट होगी। इसी कारण परियोजना की गति प्रभावित हो रही है और लाभुकों को अपने घर के लिए अभी भी इंतजार करना पड़ रहा है।
