रांची: झारखंड में जेएसएससी सीजीएल के जरिए नियुक्त किए गए अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। कार्मिक विभाग ने 10 सितंबर 2026 को सभी संबंधित विभागों और कार्यालयों को निर्देश जारी कर नियुक्त अभ्यर्थियों से पहले की तरह काम लेने को कहा है। इस आदेश के बाद उनके वेतन भुगतान का रास्ता भी साफ होने की उम्मीद है।
दरअसल, सरकार ने 18 अगस्त 2026 को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। इसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया। अदालत ने सरकार के फैसले के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाते हुए नियुक्त कर्मियों को काम जारी रखने की अनुमति दी थी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिला था विभागीय निर्देश
हाईकोर्ट की ओर से राहत मिलने के बावजूद संबंधित कर्मचारियों को औपचारिक रूप से काम पर लेने को लेकर कार्मिक विभाग की ओर से तत्काल कोई आदेश जारी नहीं हुआ था। इससे नियुक्त कर्मियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
वेतन भुगतान के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। ट्रेजरी नियमों के तहत सक्षम प्राधिकार के आधिकारिक आदेश के बिना वेतन संबंधी बिलों के भुगतान में परेशानी हो सकती है। अब 10 सितंबर के आदेश के बाद इस समस्या के दूर होने की संभावना है।
JSSC CGL भर्ती का पूरा घटनाक्रम
21 जून 2023
जेएसएससी ने 2015 रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया।
28 जनवरी 2024
सीजीएल परीक्षा आयोजित हुई। इसी दिन प्रश्नपत्र लीक होने को लेकर विवाद सामने आया।
4 फरवरी 2024
पेपर लीक के आरोपों और अभ्यर्थियों के विरोध के बाद परीक्षा स्थगित कर दी गई।
सितंबर 2024
भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए पुनर्परीक्षा आयोजित की गई।
दिसंबर 2024
पुनर्परीक्षा का परिणाम जारी किया गया।
जनवरी 2025
परिणाम के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने गड़बड़ी के आरोप लगाए और मामला हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने अंतिम चयन सूची और नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी।
3 दिसंबर 2025
लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 10 संदिग्ध अभ्यर्थियों के परिणाम रोकते हुए बाकी योग्य उम्मीदवारों की मेरिट सूची जारी करने का निर्देश दिया।
8 दिसंबर 2025
अदालत के निर्देश के बाद 1,932 अभ्यर्थियों का अंतिम परिणाम जारी किया गया और उन्हें नियुक्ति दी गई।
5 जनवरी 2026
हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन याचिका खारिज कर दी गई। अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किया।
अगस्त 2026 में सरकार ने रद्द की थी परीक्षा
जुलाई 2026 में कुछ असफल अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया। इसी बीच सीआईडी जांच में मामले से जुड़े कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
18 अगस्त 2026 को राज्य सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल समेत टीडीपीएल से जुड़ी 22 परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द करने का फैसला लिया। इससे दिसंबर 2025 में नियुक्त किए गए 1,932 अभ्यर्थियों की नौकरी प्रभावित हुई।
इसके बाद नियुक्त अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर लगाई अंतरिम रोक
21 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने नियुक्त अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का भी उल्लेख किया।
बाद की सुनवाई में नियुक्त अभ्यर्थियों की ओर से राहत जारी रखने की मांग की गई। 8 सितंबर 2026 की स्थिति के अनुसार हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत बरकरार रखी और राज्य सरकार को 15 सितंबर 2026 तक अपना स्पष्ट जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
सीआईडी जांच में कई गिरफ्तारियां
मामले की जांच के दौरान सीआईडी ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है। 22 जुलाई को मुख्य संदिग्ध और पूर्व टीडीपीएल कर्मी अभय तिवारी की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद उसकी पत्नी सुषमा और भाई अक्षय को भी गिरफ्तार किया गया।
इसके अलावा 27 अगस्त को दिल्ली के बुराड़ी से सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को पकड़ा गया। 28 अगस्त को एएसओ नियुक्ति से जुड़े चार अभ्यर्थियों—दीपक, उमेश, विजय और आनंद—की गिरफ्तारी की गई। 30 अगस्त को गिरिडीह के बेंगाबाद निवासी समीर कुमार को गिरफ्तार किया गया।
वहीं 7 सितंबर 2026 को सीआईडी ने पटना से राजन कुमार और कुंदन कुमार को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी के अनुसार, राजन पर अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पश्चिम बंगाल के नियामतपुर स्थित एक होटल में ले जाने और वहां प्रश्न-उत्तर की तैयारी कराने से जुड़े आरोप हैं।
अब नियुक्त कर्मियों की नजर 15 सितंबर की सुनवाई पर
कार्मिक विभाग के ताजा आदेश से फिलहाल नियुक्त सीजीएल कर्मियों को काम करने का रास्ता मिल गया है। इससे वेतन भुगतान से जुड़ी प्रशासनिक अड़चन भी दूर होने की उम्मीद है।
हालांकि, भर्ती प्रक्रिया और नियुक्तियों को लेकर अंतिम स्थिति अभी अदालत में विचाराधीन है। राज्य सरकार को 15 सितंबर 2026 तक अपना जवाब दाखिल करना है। ऐसे में नियुक्त अभ्यर्थियों के साथ-साथ सरकार और विभागों की नजर अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।
