हजारीबाग नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल: सड़क, सफाई, स्ट्रीट लाइट और CCTV व्यवस्था को लेकर उठे गंभीर मुद्दे
हजारीबाग, झारखंड।
नागरिक सुविधाओं की बदहाल स्थिति पर भारत सुपरफास्ट न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट; नगर निगम से खर्च, रखरखाव और जवाबदेही पर मांगा स्पष्ट जवाब
हजारीबाग नगर निगम की कार्यप्रणाली और शहर में नागरिक सुविधाओं की स्थिति को लेकर भारत सुपरफास्ट न्यूज़ की एक महत्वपूर्ण ग्राउंड रिपोर्ट सामने आई है। शहर के विभिन्न इलाकों में सड़क, नाली, सफाई, स्ट्रीट लाइट, खाद्य स्वच्छता और सरकारी CCTV व्यवस्था से जुड़े कई ऐसे सवाल सामने आ रहे हैं, जिन पर नगर निगम और संबंधित विभागों से स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की अपेक्षा है।
भारत सुपरफास्ट न्यूज़ का उद्देश्य किसी अधिकारी अथवा संस्था पर पूर्वनिर्धारित आरोप लगाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुविधाओं की वास्तविक स्थिति, सरकारी खर्च और नागरिकों के प्रति प्रशासनिक जवाबदेही को सामने लाना है।
जगह-जगह क्षतिग्रस्त सड़कें, जलजमाव से बढ़ रही परेशानी
हजारीबाग शहर की कई सड़कों पर गड्ढे और क्षतिग्रस्त हिस्से दिखाई देते हैं। कुछ स्थानों पर सड़क और नाली के बीच का अंतर भी स्पष्ट नहीं दिखाई देता। बारिश अथवा जलजमाव की स्थिति में ऐसे स्थानों पर आम नागरिकों और छोटे वाहनों के लिए परेशानी और दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
ई-रिक्शा और अन्य छोटे वाहनों के पलटने अथवा दुर्घटनाग्रस्त होने की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि नगर निगम द्वारा शहर के खतरनाक एवं क्षतिग्रस्त सड़क-स्थलों की नियमित पहचान और निरीक्षण किस प्रकार किया जाता है और चिन्हित स्थानों की मरम्मत के लिए समयबद्ध व्यवस्था क्या है?
सड़क और नाली निर्माण के लिए स्वीकृत राशि, कार्यादेश, कार्य की वर्तमान स्थिति और गुणवत्ता की निगरानी से संबंधित जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
सड़क किनारे कचरे का अंबार, नियमित सफाई व्यवस्था पर सवाल
गांधी मैदान के सामने, BSNL कार्यालय के आसपास और शहर के विभिन्न बाजार क्षेत्रों में सड़क किनारे कचरा जमा होने की स्थिति पर भी सवाल उठ रहे हैं।
यदि शहर में नियमित कचरा उठाव और सफाई की व्यवस्था संचालित है, तो सार्वजनिक स्थानों पर लंबे समय तक कचरा जमा रहने की स्थिति क्यों बनती है?
नगर निगम को यह स्पष्ट करना चाहिए कि शहर के विभिन्न वार्डों में सफाई व्यवस्था के लिए कितने संसाधन उपलब्ध हैं, कचरा उठाव का निर्धारित कार्यक्रम क्या है और इसकी निगरानी किस अधिकारी या एजेंसी द्वारा की जाती है।
सफाई व्यवस्था केवल कर्मचारियों की तैनाती तक सीमित नहीं हो सकती। इसका वास्तविक मूल्यांकन मैदानी स्थिति और नागरिक शिकायतों के निस्तारण के आधार पर किया जाना चाहिए।
स्ट्रीट लाइटें बंद, रखरखाव और भुगतान पर भी जानकारी जरूरी
शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर भी नागरिकों के बीच सवाल हैं। झील क्षेत्र सहित शहर के कई हिस्सों में कुछ लाइटें बंद, अपर्याप्त अथवा बार-बार खराब होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
ऐसे में नगर निगम को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि शहर में कुल कितनी स्ट्रीट लाइटें स्थापित हैं और वर्तमान में कितनी कार्यशील हैं।
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि—
स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?
रखरखाव के लिए कितना भुगतान किया जा रहा है?
खराब लाइट की शिकायत मिलने के बाद उसे ठीक करने की निर्धारित समयसीमा क्या है?
संबंधित एजेंसी के कार्य की निगरानी किस अधिकारी द्वारा की जाती है?
इन सवालों के जवाब से यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्ट्रीट लाइट व्यवस्था केवल स्थापना तक सीमित है या उसके लिए प्रभावी दीर्घकालीन रखरखाव व्यवस्था भी मौजूद है।
सरकारी CCTV व्यवस्था की वर्तमान स्थिति भी बने सार्वजनिक
शहर की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण विषय पूर्व में सरकारी फंड से स्थापित CCTV नेटवर्क है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पूर्व में लगभग 160 CCTV कैमरे लगाए गए थे। यदि यह संख्या और परियोजना विवरण सरकारी अभिलेखों से पुष्ट होते हैं, तो नगर निगम एवं संबंधित विभागों को इस नेटवर्क की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
विशेष रूप से यह जानकारी सामने आनी चाहिए कि वर्तमान में कितने कैमरे चालू हैं, कितने खराब हैं और कितने स्थानों पर कैमरे अथवा उनसे जुड़े उपकरण अब उपलब्ध नहीं हैं।
यदि CCTV कैमरों के साथ लगाए गए स्टील पोल, सोलर पैनल, बैटरियां और अन्य उपकरण भी सरकारी परिसंपत्ति के रूप में दर्ज थे, तो उनका स्टॉक रजिस्टर और अंतिम भौतिक सत्यापन भी महत्वपूर्ण है।
यदि रखरखाव की कमी अथवा AMC की अनुपलब्धता के कारण सरकारी CCTV व्यवस्था निष्क्रिय हुई, तो उसकी तकनीकी एवं प्रशासनिक समीक्षा क्यों नहीं की गई—यह भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
किसी उपकरण के गायब अथवा चोरी होने की स्थिति की पुष्टि केवल आधिकारिक रिकॉर्ड, भौतिक सत्यापन और सक्षम जाँच के माध्यम से की जानी चाहिए। बिना जाँच किसी व्यक्ति या संस्था को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
खुले में मांस-मछली की बिक्री और खाद्य स्वच्छता पर निगरानी जरूरी
शहर में खुले स्थानों पर मांस-मछली की बिक्री तथा अस्वच्छ परिस्थितियों में खाद्य पदार्थ तैयार किए जाने की शिकायतें भी नागरिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय हैं।
कुछ स्थानों पर खाद्य पदार्थों को खुले वातावरण में तैयार और बेचने तथा खाद्य तेल के बार-बार इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, किसी विशेष दुकान या विक्रेता के संबंध में खाद्य सुरक्षा उल्लंघन का निष्कर्ष बिना निरीक्षण और नमूना परीक्षण के नहीं निकाला जा सकता।
इसलिए नगर निगम और संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण, स्वच्छता जांच और आवश्यकता पड़ने पर खाद्य नमूनों की वैज्ञानिक जाँच की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू की जानी चाहिए।
नियम केवल नोटिस जारी करने तक सीमित न रहें; नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए नियमित निगरानी और अनुपालन की जाँच भी आवश्यक है।
नगर निगम से भारत सुपरफास्ट न्यूज़ के 7 सीधे सवाल
- शहर की क्षतिग्रस्त सड़कों और नालियों की पहचान एवं मरम्मत के लिए वर्तमान कार्ययोजना क्या है और लंबित कार्य कब तक पूरे होंगे?
- सड़क एवं नाली निर्माण/मरम्मत के लिए स्वीकृत धनराशि का क्षेत्रवार अथवा वार्डवार विवरण क्या है और अब तक कितना खर्च किया गया है?
- हजारीबाग शहर में कुल कितनी स्ट्रीट लाइटें स्थापित हैं और वर्तमान में कितनी चालू एवं कितनी खराब हैं?
- पूर्व में सरकारी धन से लगाए गए CCTV कैमरों, पोल, सोलर पैनल, बैटरियों और अन्य संबंधित सार्वजनिक परिसंपत्तियों की वर्तमान स्थिति क्या है?
- कचरा उठाव, सार्वजनिक स्थानों की सफाई, खुले में मांस-मछली की बिक्री और खाद्य स्वच्छता की नियमित निगरानी की व्यवस्था क्या है?
- सार्वजनिक धन से निर्मित परियोजनाओं के रखरखाव, AMC, भुगतान और कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के लिए जवाबदेही किस स्तर पर निर्धारित है?
- नागरिकों, व्यापारियों और संस्थाओं को नोटिस जारी करने के साथ-साथ उनकी शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की व्यवस्था क्या है?
नगर निगम की जिम्मेदारी केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं
नगर निगम का दायित्व केवल नोटिस जारी करना अथवा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करना नहीं है। नागरिक प्रशासन की मूल जिम्मेदारियों में सड़क, नाली, सफाई, प्रकाश व्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य, नागरिक सुरक्षा और सार्वजनिक परियोजनाओं का प्रभावी रखरखाव भी शामिल है।
इसीलिए किसी नागरिक, संस्था अथवा व्यवसायिक प्रतिष्ठान के विरुद्ध कार्रवाई के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि नगर निगम अपनी जिम्मेदारी के तहत उपलब्ध नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता और नियमितता सुनिश्चित करे।
इसी प्रकार, यदि कोई सार्वजनिक हित में संचालित परियोजना किसी तकनीकी, प्रशासनिक अथवा अनुबंध संबंधी कारण से बाधित होती है, तो उसे समाप्त या बाधित करने से पहले उसके सार्वजनिक लाभ, वैध अनुबंध, तकनीकी स्थिति और उपलब्ध सुधारात्मक विकल्पों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
स्वतंत्र ऑडिट और सार्वजनिक जानकारी की आवश्यकता
भारत सुपरफास्ट न्यूज़ का मानना है कि सार्वजनिक धन से संचालित नागरिक परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर तकनीकी एवं वित्तीय समीक्षा आवश्यक है।
नगर निगम और संबंधित विभागों को प्रमुख नागरिक परियोजनाओं के संबंध में स्वीकृत राशि, वास्तविक खर्च, कार्यदायी एजेंसी, रखरखाव अनुबंध, भुगतान और वर्तमान स्थिति जैसी जानकारी सार्वजनिक करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
विशेष रूप से CCTV, स्ट्रीट लाइट, सड़क, नाली और सफाई जैसी परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति का मैदानी सत्यापन नागरिकों के विश्वास को मजबूत कर सकता है।
नगर आयुक्त से जवाब की अपेक्षा
भारत सुपरफास्ट न्यूज़ की ओर से नगर आयुक्त श्री ओमप्रकाश गुप्ता तथा हजारीबाग नगर निगम प्रशासन से अपेक्षा है कि उपरोक्त सवालों पर तथ्यात्मक जवाब, संबंधित अभिलेख और वर्तमान कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए।
यह रिपोर्ट किसी अधिकारी के विरुद्ध व्यक्तिगत टिप्पणी अथवा पूर्वनिर्धारित आरोप नहीं है। इसका उद्देश्य केवल तथ्यों के आधार पर नागरिक समस्याओं को सामने लाना और प्रशासन से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करना है।
नगर आयुक्त अथवा नगर निगम प्रशासन यदि इस रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर अपना पक्ष, संबंधित दस्तावेज, आंकड़े या कार्रवाई का विवरण उपलब्ध कराता है, तो भारत सुपरफास्ट न्यूज़ उसे भी उचित एवं समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित करेगा।
हजारीबाग के नागरिकों का सवाल—पैसा कितना खर्च हुआ और काम कितना हुआ?
हजारीबाग के नागरिक यह जानना चाहते हैं कि उनके कर एवं सार्वजनिक धन से शहर में पिछले वर्षों में कौन-कौन से कार्य कराए गए, उन पर कितनी राशि खर्च हुई, संबंधित एजेंसियों को कितना भुगतान किया गया और वर्तमान में उन परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति क्या है।
सड़कें सुरक्षित हों, नालियां व्यवस्थित हों, शहर साफ रहे, स्ट्रीट लाइटें चालू रहें और सुरक्षा के लिए स्थापित CCTV व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम करे—ये किसी भी शहर की बुनियादी नागरिक आवश्यकताएं हैं।
अब जरूरत है कि शिकायतों से आगे बढ़कर तथ्य, आंकड़े, कार्ययोजना और समयसीमा सार्वजनिक की जाए।
भारत सुपरफास्ट न्यूज़
जनता के सवाल, प्रशासन से जवाब।
तथ्यों को सबसे महत्वपूर्ण और वैधानिक तरीके से रखने वाला समाचार मंच।
सबसे तेज़, सबसे आगे।
