हजारीबाग, झारखंड। वर्ष 2017 के आसपास लगाए गए सरकारी CCTV नेटवर्क की वर्तमान स्थिति पर उठे गंभीर सवाल; पुराने नेटवर्क के बंद होने के बाद नई CCTV परियोजना पर खर्च से पहले ऑडिट और भौतिक सत्यापन की मांग
हजारीबाग शहर की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी सरकारी CCTV प्रणाली की वर्तमान स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 के आसपास शहर में सरकारी फंड से बड़ी संख्या में CCTV कैमरे लगाए गए थे। बताया जाता है कि इस परियोजना में लगभग 160 CCTV कैमरे शामिल थे और इनके रखरखाव की जिम्मेदारी BSNL सहित संबंधित एजेंसियों को दी गई थी।
- हालांकि, कैमरों की वास्तविक संख्या, परियोजना की कुल लागत, रखरखाव पर हुए खर्च और वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों के अभिलेखों से होना अभी आवश्यक है।
- अधिकांश कैमरों के बंद होने की चर्चा, उपकरणों की उपलब्धता पर भी सवाल
- स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुराने सरकारी CCTV नेटवर्क के अधिकांश कैमरे लंबे समय से बंद अथवा अनुपयोगी बताए जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर CCTV कैमरों के साथ लगाए गए सोलर पैनल, बैटरियां, स्टील पोल और अन्य उपकरण भी वर्तमान में दिखाई नहीं देने की बात सामने आ रही है।
- ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सार्वजनिक फंड से खरीदे और स्थापित किए गए इन उपकरणों की वर्तमान स्थिति क्या है?
क्या उपकरण अभी भी संबंधित विभाग के कब्जे में हैं?
क्या उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया गया?
क्या खराब होने के बाद उन्हें हटाया गया?
क्या कुछ उपकरण चोरी हुए?
या किसी अन्य प्रशासनिक अथवा तकनीकी कारण से वे मौके पर उपलब्ध नहीं हैं?
- इन सवालों का वास्तविक उत्तर केवल सरकारी स्टॉक रजिस्टर, संपत्ति अभिलेख, भौतिक सत्यापन और निष्पक्ष जाँच के माध्यम से ही सामने आ सकता है।
- किसी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था पर बिना आधिकारिक जाँच के चोरी अथवा सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन सार्वजनिक फंड से निर्मित संपत्तियों का हिसाब मांगना निश्चित रूप से जनहित का विषय है।
- पुरानी व्यवस्था बंद, नई CCTV परियोजना पर जोर
- पुराने सरकारी CCTV नेटवर्क के प्रभावी रूप से काम नहीं करने की स्थिति में अपराध नियंत्रण, यातायात निगरानी और विभिन्न घटनाओं की जाँच के दौरान प्रशासन को निजी संस्थानों, दुकानों तथा अन्य स्थानों पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
- इसी बीच यदि निजी संस्थाएं अथवा एजेंसियां अपने संसाधनों से होर्डिंग, यूनिपोल, गैंट्री अथवा अन्य संरचनाओं पर CCTV कैमरे स्थापित कर उनका संचालन और रखरखाव कर रही हैं, तो ऐसी व्यवस्थाओं का प्रशासन द्वारा तकनीकी और जनहित के दृष्टिकोण से निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है।
- निजी क्षेत्र की ऐसी व्यवस्थाएं सरकारी CCTV का विकल्प हैं या केवल पूरक व्यवस्था—इसका स्पष्ट निर्धारण भी नीति स्तर पर होना चाहिए।
- नई परियोजना से पहले पुरानी परियोजना का हिसाब क्यों नहीं?
- प्रशासन द्वारा दिसंबर 2025 में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की निगरानी के लिए AI-सक्षम CCTV व्यवस्था से संबंधित नई परियोजना/टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।
- नई तकनीक और आधुनिक निगरानी प्रणाली का स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि जब पूर्व में सरकारी फंड से CCTV नेटवर्क स्थापित किया गया था, तो उसकी विफलता के कारणों का तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन किस स्तर पर किया गया?
- यदि पुरानी व्यवस्था रखरखाव के अभाव में बंद हुई, तो नई परियोजना में AMC, तकनीकी सहायता, बिजली/सौर ऊर्जा, नेटवर्क कनेक्टिविटी, उपकरण सुरक्षा और जवाबदेही के लिए क्या ठोस व्यवस्था की गई है?
- नई परियोजना की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि पिछली व्यवस्था से क्या सबक लिया गया है।
- प्रशासन से भारत सुपरफास्ट न्यूज़ के 10 सीधे सवाल
- वर्ष 2017 के आसपास सरकारी फंड से हजारीबाग शहर में कुल कितने CCTV कैमरे लगाए गए थे?
- उस परियोजना की कुल स्वीकृत लागत और वास्तविक व्यय कितना था?
- CCTV नेटवर्क के संचालन एवं रखरखाव के लिए BSNL अथवा किसी अन्य एजेंसी के साथ हुए AMC/अनुबंध की शर्तें क्या थीं?
- संबंधित एजेंसी को कुल कितना भुगतान किया गया और कितना भुगतान लंबित रहा?
- वर्तमान में कितने सरकारी CCTV कैमरे चालू हैं, कितने खराब हैं और कितने पूरी तरह अनुपलब्ध हैं?
- CCTV कैमरों के साथ लगाए गए स्टील पोल, सोलर पैनल, बैटरियों और अन्य उपकरणों का स्टॉक रजिस्टर किस विभाग के पास है?
- इन सरकारी परिसंपत्तियों का अंतिम भौतिक सत्यापन कब किया गया और किस अधिकारी/समिति द्वारा किया गया?
- यदि रखरखाव में लापरवाही अथवा तकनीकी विफलता हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी या एजेंसी पर निर्धारित की गई?
- पुरानी CCTV व्यवस्था को पुनः कार्यशील बनाने के विकल्प का तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन किया गया था या नहीं?
- नई CCTV परियोजना में दीर्घकालीन रखरखाव, उपकरणों की सुरक्षा, डेटा प्रबंधन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं?
- स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय ऑडिट की मांग
- भारत सुपरफास्ट न्यूज़ का मानना है कि CCTV जैसी नागरिक सुरक्षा परियोजनाएं सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा और सार्वजनिक धन दोनों से जुड़ी होती हैं। इसलिए पिछले वर्षों में नगर निगम एवं संबंधित विभागों द्वारा CCTV और अन्य नागरिक सुरक्षा परियोजनाओं पर किए गए खर्च का स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाना चाहिए।
- साथ ही प्रत्येक परियोजना के संबंध में—
स्वीकृत बजट और वास्तविक खर्च,
स्थापित उपकरणों की संख्या,
संबंधित एजेंसी,
AMC/रखरखाव अनुबंध,
भुगतान का विवरण,
वर्तमान भौतिक स्थिति,
खराब अथवा अनुपलब्ध उपकरणों का विवरण,
तथा जिम्मेदारी तय किए जाने की स्थिति
जैसी जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
- उद्देश्य आरोप लगाना नहीं, जवाबदेही सुनिश्चित करना
- यह रिपोर्ट किसी अधिकारी, सरकारी विभाग, BSNL अथवा किसी अन्य एजेंसी को दोषी घोषित नहीं करती। उपलब्ध जानकारी में उठे सवालों का उद्देश्य केवल सार्वजनिक फंड, सरकारी परिसंपत्तियों और शहर की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
- यदि किसी उपकरण के गायब होने, चोरी होने या क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आती है, तो उसकी पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, पुलिस रिपोर्ट, भौतिक सत्यापन और सक्षम जाँच के माध्यम से की जानी चाहिए।
- भारत सुपरफास्ट न्यूज़ जिला प्रशासन, हजारीबाग नगर निगम, BSNL तथा संबंधित विभागों से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया की अपेक्षा करता है। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी उचित एवं समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।
- जनता का पैसा, जनता का सवाल
- CCTV केवल कैमरा नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि पहले लगाए गए कैमरों का क्या हुआ, उनकी व्यवस्था क्यों विफल हुई और नई परियोजना में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
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