रांची: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से हटाने की मांग की है। उन्होंने समिति में उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग रखी है।
मरांडी ने अपने पत्र में कहा है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित समिति में ऐसे अधिकारी को जिम्मेदारी देना उचित नहीं है, जिसकी भूमिका को लेकर पहले से सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे संभावित हितों के टकराव का मामला बताया।
CGL परीक्षा में गड़बड़ी का उठाया मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि प्रशांत कुमार के आयोग के अध्यक्ष पद संभालने के दौरान सितंबर 2024 में आयोजित CGL परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। विवाद के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी और आयोग के कार्यालय में जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी हुई थी।
मरांडी का कहना है कि ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी की भूमिका की स्वतंत्र जांच पहले होनी चाहिए, न कि उन्हें परीक्षा सुधार से जुड़ी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
पुराने प्रशासनिक मामलों का भी जिक्र
पत्र में बाबूलाल मरांडी ने प्रशांत कुमार के पूर्व प्रशासनिक कार्यकाल से जुड़े कुछ मामलों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने वित्त विभाग में उनके कार्यकाल के दौरान सरकारी खातों में कथित वित्तीय अंतर का मुद्दा उठाया। इसके अलावा जल संसाधन विभाग से संबंधित एक मामले में अदालत की ओर से लगाए गए जुर्माने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
JSSC अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
बाबूलाल मरांडी ने परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के लिए JSSC के प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार और सचिव सुधीर गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने दोनों को पद से हटाने और गिरफ्तारी की मांग भी पत्र में रखी है।
परीक्षा सुधार समिति में विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव
नेता प्रतिपक्ष ने परीक्षा सुधार समिति के स्वरूप में बदलाव की मांग करते हुए न्यायिक और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल करने का सुझाव दिया है।
इसके अलावा उन्होंने JPSC और JSSC से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आए कथित मामलों की व्यापक जांच CBI से कराने की मांग की है।
