मुंबई: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। दिनभर उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू बाजार अंत में बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंतिम चरण में खरीदारी बढ़ने से प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली।
कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 160.83 अंक यानी 0.21 प्रतिशत बढ़कर 77,529.94 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 में 41 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की तेजी रही और यह 24,260.05 के स्तर पर बंद हुआ।
मासिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के बीच बाजार में शॉर्ट-कवरिंग ने भी अंतिम घंटों में तेजी को सहारा दिया।
कच्चे तेल में गिरावट से निवेशकों को राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 3 प्रतिशत से ज्यादा घटकर करीब 89.26 डॉलर प्रति बैरल रह गई। अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख की उम्मीद के बीच तेल की कीमतों में दबाव देखने को मिला।
कच्चे तेल की कीमतों में कमी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए सकारात्मक मानी जाती है। इससे महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर बाजार की चिंताएं कुछ कम हुईं।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक, तेल की कीमतों और सरकारी बॉन्ड यील्ड में नरमी ने निवेशकों की धारणा को बेहतर किया। बाजार में घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों के प्रति भी रुचि दिखाई दी।
इन सेक्टर्स में रही तेजी
मंगलवार को निफ्टी के कई प्रमुख सेक्टर बढ़त में रहे।
- कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: 0.76% ऊपर
- हेल्थकेयर: 0.72% बढ़त
- फार्मा: 0.56% तेजी
- पीएसयू बैंक: 0.56% बढ़त
दूसरी ओर कुछ सेक्टरों में बिकवाली भी देखने को मिली।
- मेटल: 0.59% गिरावट
- प्राइवेट बैंक: 0.31% नीचे
- ऑयल एंड गैस: 0.06% गिरावट
- आईटी: 0.06% नीचे
इन शेयरों में ज्यादा हलचल
निफ्टी 50 में अदानी एंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थकेयर, इंडिगो और अपोलो हॉस्पिटल्स बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे।
वहीं सिप्ला, हिंडाल्को, ओएनजीसी, विप्रो और टाटा स्टील में दबाव देखने को मिला।
रुपया मजबूत, सोना-चांदी में स्थिरता
मुद्रा बाजार में भी रुपये को राहत मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा 34 पैसे मजबूत होकर 95.41 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई।
कीमती धातुओं में 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1,62,910 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि चांदी 2,42,550 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर रही।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आगे बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतें और प्रमुख तकनीकी स्तर अहम भूमिका निभा सकते हैं।
