पटना: जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमानों की सुरक्षा को लेकर बर्ड स्ट्राइक की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में एयरपोर्ट पर पक्षियों के विमानों से टकराने के 9 मामले सामने आए। एयरपोर्ट के आसपास कचरा, जलजमाव और खुले में मांस-मछली की बिक्री को पक्षियों की मौजूदगी बढ़ने की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है।
चार साल के आंकड़ों में बड़ा अंतर
पटना एयरपोर्ट पर दर्ज बर्ड हिट के आंकड़ों में पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव देखा गया है।
- 2021: 2 मामले
- 2022: 1 मामला
- 2023: 1 मामला
- 2025: 9 मामले
2025 का आंकड़ा पहले के वर्षों की तुलना में काफी अधिक रहा, जिससे एयरपोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्र में पक्षी नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
अप्रैल में हुई थी पर्यावरण प्रबंधन समिति की बैठक
विमान संचालन को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से अप्रैल में एयरफील्ड एनवायरमेंट मैनेजमेंट कमेटी (AEMC) की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें एयरपोर्ट के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, कचरे का उचित प्रबंधन करने और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी पर जोर दिया गया था।
बैठक में यह भी सामने आया कि खुले में पड़ा कचरा, जलजमाव और खाद्य पदार्थों के अवशेष पक्षियों को एयरपोर्ट के आसपास आने के लिए आकर्षित कर सकते हैं।
मांस-मछली की दुकानों से भी बढ़ता है खतरा
एयरपोर्ट के आसपास खुले में मांस और मछली की बिक्री तथा इनके अवशेषों का उचित निस्तारण नहीं होने से चील और अन्य बड़े पक्षियों की संख्या बढ़ने की आशंका रहती है। इन पक्षियों की मौजूदगी विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान विशेष चिंता का विषय बन जाती है।
फुलवारीशरीफ सहित आसपास के क्षेत्रों में खुले में मांस-मछली की बिक्री पर नियंत्रण के निर्देश दिए जाते रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसका प्रभाव पूरी तरह दिखाई नहीं देने की बात सामने आई है।
पक्षियों को दूर रखने के लिए विशेष व्यवस्था
एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से पक्षियों को रनवे और ऑपरेशनल क्षेत्र से दूर रखने के लिए बर्ड चेजर्स तैनात किए गए हैं। इसके अलावा पक्षियों को डराने के लिए स्केयर गन, पटाखे और अन्य निर्धारित उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है।
विमानों के उड़ान भरने और उतरने के समय पक्षी नियंत्रण से जुड़े कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई जाती है।
मानसून में बढ़ जाती है चुनौती
बरसात के मौसम में रनवे के आसपास उगने वाली घास और वनस्पतियों में कीड़े-मकौड़ों की संख्या बढ़ सकती है। इन्हें खाने के लिए पक्षियों के एयरफील्ड के आसपास आने की संभावना रहती है। इसी वजह से एयरपोर्ट क्षेत्र में घास और वनस्पति की नियमित सफाई पर भी ध्यान दिया जाता है।
जलजमाव और कचरा प्रबंधन पर भी सवाल
एयरपोर्ट के आसपास जलजमाव की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। इसके अलावा गर्दनीबाग स्थित गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन को स्थानांतरित करने की योजना पर भी अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं होने की बात सामने आई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पक्षियों को आकर्षित करने वाले कारणों पर एक साथ काम किए बिना बर्ड स्ट्राइक का खतरा पूरी तरह कम करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए एयरपोर्ट के आसपास स्वच्छता, कचरा निस्तारण, जलजमाव नियंत्रण और खुले में खाद्य अवशेष फेंकने पर प्रभावी रोक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
