Tuesday, August 25, 2026

झारखंड में 2,119 संभावित वेटलैंड की पहचान, सीएम हेमंत सोरेन ने संरक्षण पर दिया जोर.

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रांची: झारखंड में प्राकृतिक जल क्षेत्रों के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने कवायद तेज कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई झारखंड राज्य वेटलैंड प्राधिकरण की पहली बैठक में प्रदेश के वेटलैंड की पहचान, सत्यापन, सीमांकन, अधिसूचना और प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य में मौजूद वेटलैंड का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जाए और समय-समय पर इसे अपडेट किया जाए। इसके लिए डिजिटल डेटाबेस विकसित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि जल क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध रह सके।

इसरो के एटलस से सामने आए 2,119 संभावित वेटलैंड

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इसरो के एटलस के आधार पर झारखंड में 2,119 संभावित वेटलैंड चिह्नित किए गए हैं। अब इन स्थानों का जिला स्तर पर भौतिक और दस्तावेजी सत्यापन कराया जाएगा।

सत्यापन के बाद संबंधित जल क्षेत्रों की पहचान और वास्तविक सीमा तय करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद निर्धारित नियमों के अनुसार नोटिफिकेशन की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।

वेटलैंड क्यों हैं महत्वपूर्ण?

वेटलैंड में ऐसे प्राकृतिक या कृत्रिम क्षेत्र शामिल होते हैं, जहां सालभर या मौसम के अनुसार पानी मौजूद रहता है। तालाब, झील, दलदली क्षेत्र और कुछ जलभराव वाले इलाके इसके उदाहरण हैं।

ये जल क्षेत्र भूजल स्तर को बनाए रखने, बाढ़ के प्रभाव को कम करने, पानी के संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके आसपास कई प्रजातियों के पक्षियों और अन्य जीवों को भी प्राकृतिक आवास मिलता है।

अतिक्रमण और नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर निगरानी

सरकार की योजना केवल वेटलैंड की पहचान तक सीमित नहीं है। सत्यापन के दौरान संबंधित क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति, जल स्रोत और आसपास चल रही मानवीय गतिविधियों का भी आकलन किया जाएगा।

वेटलैंड से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ अतिक्रमण और जल क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी है। जिला स्तर पर गठित समितियां अपनी रिपोर्ट राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को सौंपेंगी।

सीमांकन के बाद अधिसूचना की प्रक्रिया

मुख्यमंत्री ने चिह्नित वेटलैंड का निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीमांकन कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद संबंधित जल क्षेत्रों की अधिसूचना की कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का लक्ष्य वेटलैंड की पहचान से लेकर उनके सत्यापन, सीमांकन, अधिसूचना और संरक्षण के लिए प्रबंधन योजना तैयार करने तक एक व्यवस्थित प्रक्रिया विकसित करना है।

महत्वपूर्ण वेटलैंड के लिए बनेगी अलग प्रबंधन योजना

राज्य सरकार महत्वपूर्ण वेटलैंड की वर्तमान स्थिति का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करने पर भी काम करेगी। इसमें जल स्रोत, आसपास की गतिविधियों और समय के साथ हुए बदलावों जैसी जानकारियों को शामिल किया जा सकता है।

इन आंकड़ों के आधार पर जरूरत के मुताबिक अलग-अलग वेटलैंड के लिए प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी। इससे संरक्षण और पुनर्जीवन से जुड़े कार्यों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

वेटलैंड प्राधिकरण को मजबूत करने पर भी चर्चा

बैठक में झारखंड राज्य वेटलैंड प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने से संबंधित प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। इनमें टेंडर और खरीद प्रक्रिया से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा के लिए समिति बनाने, तकनीकी समिति गठित करने और लोगों की शिकायतों के निपटारे के लिए व्यवस्था विकसित करने जैसे विषय शामिल रहे।

प्राधिकरण के प्रभावी संचालन के लिए बजट, कार्यालय संबंधी आवश्यकताओं और मानव संसाधन उपलब्ध कराने पर भी विचार किया गया।

सरकार का जोर इस बात पर है कि वेटलैंड संरक्षण से जुड़े प्रावधान केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन जमीन पर भी दिखाई दे। जल संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से आने वाले समय में इन प्राकृतिक जल क्षेत्रों की भूमिका अहम मानी जा रही है।

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