नई दिल्ली: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने Amazon Seller Services पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। मामला ऐसे उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री से जुड़ा है, जिन्हें ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ के नाम से प्रचारित किया गया था। नियामक के अनुसार, इन उत्पादों को लेकर ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया कि उन्हें संबंधित मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक अनुमति या मान्यता प्राप्त थी।
2024 में दर्ज हुई थी शिकायत
मामले की शुरुआत जनवरी 2024 में हुई थी। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने 19 जनवरी को इस संबंध में शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि Amazon के प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग मिठाइयों को अयोध्या स्थित राम मंदिर के प्रसाद के तौर पर पेश किया जा रहा था।
बताया गया कि इन उत्पादों की कीमत करीब ₹299 से ₹385 के बीच रखी गई थी। इसके बाद CCPA ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कंपनी से जवाब मांगा था।
धार्मिक नाम के इस्तेमाल पर नियामक ने जताई आपत्ति
CCPA ने अपने आदेश में कहा कि किसी प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल के नाम से जुड़े प्रसाद को बिना प्रमाणिकता के व्यावसायिक रूप से प्रस्तुत करना उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है। खासतौर पर ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ जैसे नाम से खरीदारों को यह धारणा हो सकती है कि उत्पाद वास्तव में मंदिर या संबंधित ट्रस्ट से जुड़ा हुआ है।
नियामक ने माना कि ऐसे प्रचार से उपभोक्ता के निर्णय पर असर पड़ सकता है और धार्मिक आस्था से जुड़े नाम का व्यावसायिक इस्तेमाल भी गंभीर विषय है।
बिक्री और Amazon की भूमिका पर क्या सामने आया?
जांच के दौरान सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, संबंधित लिस्टिंग के माध्यम से कुल सकल बिक्री करीब ₹25.26 लाख रही। इसमें Amazon की ओर से अर्जित सेवा शुल्क लगभग ₹15,165 बताया गया।
कंपनी ने अपनी ओर से यह तर्क दिया कि वह विक्रेता और खरीदार के बीच एक मध्यस्थ के तौर पर काम करती है। हालांकि, CCPA ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। प्राधिकरण के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत उपलब्ध सुरक्षा को उपभोक्ता संरक्षण से संबंधित जिम्मेदारियों से अलग करके देखा जाना चाहिए।
आगे के लिए भी दिए गए निर्देश
CCPA ने Amazon को भविष्य में धार्मिक स्थलों से जुड़े प्रसाद या भोग की बिक्री के मामले में अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। आदेश के मुताबिक, संबंधित धार्मिक संस्था या ट्रस्ट की प्रामाणिक अनुमति और दस्तावेज उपलब्ध होने के बाद ही ऐसे उत्पादों को प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।
इसके अलावा कंपनी को विक्रेताओं से जुड़ी पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराने और उपभोक्ताओं के लिए शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
