गुमला: जिला प्रशासन ने कृषि और वनोपज से जुड़े किसानों व संग्रहकर्ताओं को बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाने की दिशा में पहल तेज करने का निर्णय लिया है। गुरुवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त दिलीपेश्वर महतो की अध्यक्षता में सिद्धो-कान्हो कृषि एवं वनोपज जिला सहकारी संघ के निदेशक मंडल की बैठक हुई। इसमें संघ के कामकाज की समीक्षा के साथ आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
किसानों को उचित मूल्य दिलाने पर फोकस
बैठक में बताया गया कि जिले में करंज बीज, लाह, इमली, रागी और महुआ समेत कई कृषि एवं वनोपज का उत्पादन और संग्रहण होता है। हालांकि, बाजार की सीमित जानकारी और उचित विपणन व्यवस्था के अभाव में कई बार उत्पादकों को अपेक्षित कीमत नहीं मिल पाती।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों और वनोपज संग्रहकर्ताओं के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्हें उत्पादों के बाजार मूल्य, बिक्री की प्रक्रिया और सहकारी संघ के माध्यम से उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी जाए। प्रशासन का उद्देश्य बिचौलियों पर निर्भरता घटाकर उत्पादकों को बेहतर आर्थिक लाभ पहुंचाना है।
पंचायत स्तर तक पहुंचेगी संघ की गतिविधियां
समीक्षा के दौरान संघ के गठन और उसके उद्देश्यों पर भी चर्चा हुई। वर्ष 2021 में स्थापित इस सहकारी संघ का लक्ष्य जिले के कृषि उत्पादों और वनोपज को एकत्र कर उनके लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।
उपायुक्त ने संघ की गतिविधियों को पंचायत और प्रखंड स्तर तक विस्तार देने तथा अधिक से अधिक किसानों एवं वनोपज संग्रहकर्ताओं को इससे जोड़ने पर जोर दिया।
पुराने आईटीडीए भवन में बनेगा कार्यालय
बैठक में संघ के लिए अलग कार्यालय नहीं होने का मुद्दा भी सामने आया। इस पर उपायुक्त ने पुराने आईटीडीए कार्यालय भवन को सिद्धो-कान्हो कृषि एवं वनोपज जिला सहकारी संघ के कार्यालय के रूप में उपयोग करने का निर्देश दिया।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को संघ की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने और किसानों तक योजनाओं व बाजार से जुड़ी जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा।
अधिकारी और प्रतिनिधि रहे मौजूद
बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी सह प्रबंध निदेशक सिद्धकोफेड अहमद बेलाल अनवर, जिला कल्याण पदाधिकारी आलोक रंजन, जिला सहकारिता पदाधिकारी माधुरी बेग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा लैम्पस के निर्वाचित निदेशक मंडल के सदस्य और संबंधित कर्मचारी भी बैठक में शामिल हुए।
मुख्य उद्देश्य: किसानों और वनोपज संग्रहकर्ताओं को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और सहकारी व्यवस्था से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी व्यवस्था तैयार करना।
