नई दिल्ली: भारत में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के एक लेख के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या E20 पेट्रोल के साथ पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल भी बाजार में उपलब्ध कराया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के बीच जहां इस विकल्प को उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी माना जा रहा है, वहीं अलग सप्लाई व्यवस्था तैयार करने की लागत और लॉजिस्टिक्स को लेकर चिंता भी जताई गई है।
E20 के साथ E10 उपलब्ध कराने का सुझाव
मुख्य आर्थिक सलाहकार का सुझाव एथेनॉल मिश्रण की मौजूदा नीति को वापस लेने के बजाय उपभोक्ताओं को विकल्प देने पर केंद्रित है। उनका मानना है कि नए वाहन E20 ईंधन के अनुरूप बनाए जा रहे हैं, लेकिन पुराने वाहनों के मालिकों को कम एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल चुनने की सुविधा मिलनी चाहिए।
देश में बड़ी संख्या में पुराने वाहन मौजूद हैं। ऐसे में E10 की उपलब्धता को लेकर यह तर्क दिया जा रहा है कि इससे उन वाहन मालिकों को विकल्प मिल सकता है, जिनकी गाड़ियां अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए डिजाइन नहीं की गई थीं।
अलग सप्लाई नेटवर्क सबसे बड़ी चुनौती
तेल और गैस क्षेत्र के विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा के मुताबिक E10 को दोबारा बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराने का विचार उपभोक्ता हित में हो सकता है, लेकिन इसे पूरे देश में लागू करना आसान नहीं होगा।
उनके अनुसार E10 की अलग आपूर्ति व्यवस्था के लिए पेट्रोलियम क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में अतिरिक्त निवेश की जरूरत पड़ सकती है। इसमें मुख्य रूप से तीन स्तर शामिल हैं:
- ब्लेंडिंग व्यवस्था: पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग मिश्रण तैयार करने के लिए अतिरिक्त प्रबंध करने होंगे।
- परिवहन नेटवर्क: E10 को रिफाइनरी या डिपो से पेट्रोल पंपों तक पहुंचाने के लिए अलग लॉजिस्टिक व्यवस्था की आवश्यकता हो सकती है।
- पेट्रोल पंपों पर सुविधा: बड़ी संख्या में ईंधन स्टेशनों पर अलग स्टोरेज और डिस्पेंसिंग की व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों के सामने यह सवाल भी है कि इस अतिरिक्त बुनियादी ढांचे का खर्च तेल कंपनियां उठाएंगी या इसका असर अंततः ईंधन की कीमतों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। पूरे नेटवर्क को तैयार करने में समय लगने की संभावना भी जताई गई है।
पेट्रोल पंप डीलर्स का क्या कहना है?
ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल का रुख उपभोक्ता की मांग को प्राथमिकता देने वाला है। उनका कहना है कि यदि ग्राहकों के बीच E10 की मांग मौजूद है, तो तेल कंपनियों को उसकी उपलब्धता पर विचार करना चाहिए।
डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक कई पेट्रोल पंपों पर पहले से स्टोरेज टैंक और डिस्पेंसिंग मशीनें मौजूद हैं। हालांकि, रिफाइनरी और तेल डिपो के स्तर पर अतिरिक्त भंडारण तथा हैंडलिंग सुविधाओं की जरूरत पड़ सकती है।
पुरानी और नई गाड़ियों के बीच ईंधन का सवाल
भारत में E20 अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नए वाहनों को उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। दूसरी ओर, पुराने वाहनों के मालिकों के लिए E10 की उपलब्धता एक अलग विकल्प के रूप में चर्चा में है।
हालांकि, E10 और E20 दोनों को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने के लिए अलग सप्लाई चेन बनाए रखना कितना आर्थिक रूप से व्यवहारिक होगा, यह अभी बहस का विषय है।
फिलहाल E10 की दोबारा व्यापक उपलब्धता को लेकर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। आगे की नीति में उपभोक्ता हित, पुराने वाहनों की जरूरत, एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य और अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत जैसे पहलुओं के बीच संतुलन अहम रहेगा।
