Tuesday, August 18, 2026

JSSC-CGL नियुक्तियां रद्द करने के फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुटी भीड़.

Share

रांची: JSSC-CGL परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों और नवनियुक्त कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। सोमवार देर रात से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर पहुंचकर सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं।

प्रोजेक्ट भवन का मुख्य गेट बंद

प्रदर्शन को देखते हुए प्रोजेक्ट भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। मंत्रालय का मुख्य प्रवेश द्वार बंद रखा गया और प्रदर्शन कर रहे CGL चयनित अभ्यर्थियों को परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया। वहीं नियमित कर्मचारियों को पहचान पत्र की जांच के बाद अंदर जाने की अनुमति दी गई।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मांग है कि नियुक्तियां रद्द करने से पहले परीक्षा और चयन प्रक्रिया में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

अभ्यर्थियों ने उठाया नियुक्तियां रद्द करने पर सवाल

चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो जांच के जरिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए। उनका सवाल है कि कथित अनियमितताओं के लिए पूरी चयन प्रक्रिया और सभी नियुक्तियों को रद्द करना कितना उचित है।

प्रदर्शन कर रहे कुछ अभ्यर्थियों के अनुसार, उन्होंने JSSC-CGL में चयन के बाद अपनी पुरानी नौकरियां तक छोड़ दी थीं। उनका कहना है कि कुछ उम्मीदवार दूसरे सरकारी विभागों या केंद्र सरकार की सेवाओं में काम कर रहे थे और नियुक्ति मिलने के बाद झारखंड में योगदान दिया।

दोषियों पर कार्रवाई की मांग

अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने भविष्य और अधिकारों को लेकर है। उनकी मांग है कि परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो।

उनका कहना है कि जांच में यदि किसी अभ्यर्थी, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। लेकिन बिना पूरी जांच के सभी चयनित उम्मीदवारों को एक समान तरीके से प्रभावित करना उचित नहीं होगा।

सरकार से स्पष्ट जवाब चाहते हैं अभ्यर्थी

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक उन्हें नियुक्ति पत्र मिला था और वे संबंधित विभागों में काम भी कर रहे थे। ऐसे में नियुक्तियां रद्द होने के फैसले से उनके सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती भी की गई। अभ्यर्थी लगातार सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते रहे।

फिलहाल चयनित अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। उनका कहना है कि जांच में जो भी दोषी मिले, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन निष्पक्ष जांच पूरी होने से पहले सभी चयनित उम्मीदवारों के भविष्य पर फैसला नहीं किया जाना चाहिए।

Read more

Local News