रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच JSSC CGL समेत कुछ परीक्षाओं को रद्द किए जाने के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने आंदोलन के अगले चरण की रूपरेखा बताई है। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होना आंदोलन के शुरुआती चरण की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन इसे अंतिम सफलता नहीं माना जा सकता।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में महतो ने कहा कि अब छात्रों का मुख्य मुद्दा ऐसी भर्ती परीक्षा व्यवस्था तैयार कराना है, जिसमें प्रश्नपत्र लीक, अनियमितता या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम से कम हो। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की मांग की।
परीक्षा रद्द होने के बाद आंदोलन का दूसरा चरण
देवेंद्र नाथ महतो के अनुसार, परीक्षा रद्द किए जाने के साथ आंदोलन का पहला चरण पूरा हुआ है। अब आंदोलन का दूसरा चरण परीक्षा व्यवस्था में सुधार यानी ‘रिफॉर्म’ पर केंद्रित रहेगा।
उन्होंने कहा कि जब तक परीक्षा संचालन में ठोस बदलाव और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था को लेकर स्पष्ट कदम नहीं उठाए जाते, तब तक छात्रों का धरना जारी रहेगा।
जुलाई से शुरू हुआ आंदोलन
महतो ने आंदोलन की शुरुआत से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी भी दी। उनके मुताबिक आंदोलन 2 जुलाई से शुरू हुआ था। इसके बाद 21 जुलाई से CID जांच शुरू हुई और 25 जुलाई को बापू वाटिका से सत्याग्रह की शुरुआत की गई, जिसे बाद में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक ले जाया गया।
उन्होंने बताया कि 2 अगस्त से उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। आंदोलन के दौरान विधानसभा घेराव, तिरंगा यात्रा और मशाल जुलूस समेत कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।
स्वास्थ्य खराब होने का भी किया जिक्र
प्रेस वार्ता के दौरान महतो ने भूख हड़ताल के दौरान अपनी तबीयत बिगड़ने की बात कही। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान उनकी स्थिति गंभीर हो गई थी और चिकित्सकों ने गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की आशंका जताई थी। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन की मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखा।
उन्होंने आंदोलन के दौरान सहयोग देने वाले प्रशासन, सरकार, मीडिया, चिकित्सकीय टीम और समर्थकों के प्रति आभार जताया। साथ ही बताया कि भूख हड़ताल समाप्त हो चुकी है, लेकिन जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का धरना जारी रहेगा।
जांच के साथ परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि केवल परीक्षा रद्द करना या मामले की जांच किसी जांच एजेंसी को सौंप देना स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने भर्ती परीक्षा प्रणाली की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की।
उन्होंने पूरी भर्ती प्रक्रिया का वित्तीय और प्रशासनिक ऑडिट कराने की भी मांग रखी, ताकि व्यवस्था में संभावित खामियों की पहचान की जा सके और जिम्मेदारी तय हो।
प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में गोपनीयता पर जोर
महतो ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रश्नपत्र निर्माण के अलग-अलग चरणों में शामिल अधिकारियों को आवश्यकता के मुताबिक ही जानकारी उपलब्ध हो।
उनका कहना है कि प्रक्रिया के किसी एक स्तर पर काम करने वाले व्यक्ति के पास पूरी व्यवस्था की जानकारी नहीं होनी चाहिए। साथ ही प्रत्येक चरण पूरा होने के बाद जिम्मेदारी तय करने के लिए लिखित प्रमाण, क्लीयरेंस सर्टिफिकेट या शपथपत्र जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई।
कानून में बदलाव की भी मांग
छात्र नेता ने कहा कि यदि मौजूदा कानूनी प्रावधान भर्ती परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को पर्याप्त रूप से जवाबदेह बनाने में बाधा बनते हैं, तो सरकार को कानून में आवश्यक संशोधन पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्रों का मुख्य काम पढ़ाई करना और परीक्षा देना है। परीक्षा व्यवस्था की कमियों के खिलाफ बार-बार आंदोलन करने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। उनका कहना है कि आंदोलन का अगला लक्ष्य पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह भर्ती परीक्षा प्रणाली तैयार कराना है, ताकि भविष्य में विद्यार्थियों को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
