जमशेदपुर: झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में अनुबंध के आधार पर सेवा दे रहे सहायक पुलिसकर्मियों के भविष्य को लेकर फिर अनिश्चितता बढ़ गई है। राज्य में वर्ष 2017 में नियुक्त करीब 2,500 सहायक पुलिसकर्मियों में अब लगभग 1,800 कर्मी बचे हैं। इनका अनुबंध जुलाई 2026 में समाप्त हो चुका है। इसी बीच पूर्वी सिंहभूम जिले के 72 सहायक पुलिसकर्मियों को वापस पुलिस लाइन बुलाने का निर्देश जारी किया गया है।
सेवा विस्तार का आदेश नहीं मिलने पर कार्रवाई
पूर्वी सिंहभूम SSP कार्यालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, सहायक पुलिसकर्मियों की सेवा के नौ वर्ष 13 अगस्त को पूरे हो चुके हैं। सेवा विस्तार को लेकर 4 अगस्त को कोल्हान DIG कार्यालय से पत्राचार किया गया था, लेकिन अभी तक अवधि बढ़ाने संबंधी आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
इसके बाद जिले के थाना प्रभारियों और घाटशिला यातायात प्रभारी को 72 सहायक पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन में वापस बुलाने का निर्देश दिया गया। इनमें 50 पुरुष और 22 महिला कर्मी शामिल हैं।
संघ ने उठाया रोजगार का मुद्दा
झारखंड सहायक पुलिसकर्मी संघ के सचिव विवेकानंद गुप्ता के अनुसार, कई कर्मियों ने अपनी नौकरी के वर्षों इसी सेवा में लगा दिए हैं। ऐसे में अनुबंध समाप्त होने पर उनके सामने रोजगार का संकट पैदा हो सकता है। संघ सेवा विस्तार के साथ आरक्षी संवर्ग में समायोजन और स्थायी नियुक्ति की मांग कर रहा है।
संघ का कहना है कि करीब 1,800 सहायक पुलिसकर्मियों की मांगों को लेकर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को ज्ञापन भी सौंपा गया था। संगठन के मुताबिक, सेवा जारी रखने को लेकर आश्वासन मिला था, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई स्पष्ट सरकारी आदेश नहीं आया है।
12 जिलों में हुई थी नियुक्ति
सहायक पुलिसकर्मियों की नियुक्ति 2017 में राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों में की गई थी। इनमें पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, चतरा, पलामू, गढ़वा, दुमका, लातेहार, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, लोहरदगा और गिरिडीह शामिल हैं। इनकी तैनाती का उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस व्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती देना था।
नियमित सेवा की मांग पर जोर
संघ का दावा है कि सहायक पुलिसकर्मियों से गश्त, एलआरपी, कार्यालयी कार्य और त्योहारों के दौरान यातायात प्रबंधन जैसी विभिन्न जिम्मेदारियां ली जाती हैं। संगठन के अनुसार, उन्हें करीब 13 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है और उनकी जिम्मेदारियों के अनुपात में वेतन व सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं।
संघ ने सहायक पुलिसकर्मियों को नियमित करने के लिए छत्तीसगढ़ की व्यवस्था का उदाहरण भी दिया है। संगठन का कहना है कि वहां सहायक आरक्षकों को डिस्ट्रिक्ट स्ट्राइक फोर्स संवर्ग में शामिल कर स्थायी सेवा का अवसर दिया गया।
अब सहायक पुलिसकर्मियों की नजर राज्य सरकार के अगले फैसले पर है। संघ ने सरकार से सेवा विस्तार और नियमितीकरण को लेकर जल्द स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की है।
