नई दिल्ली: UPI भुगतान को लेकर लोगों के बीच चल रही फीस की चर्चाओं के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों के लिए UPI पेमेंट पर सीधे तौर पर कोई शुल्क लगाने का प्रस्ताव नहीं है। छोटे दुकानदारों और आम ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था को मुफ्त बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ UPI नेटवर्क के संचालन, साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने से जुड़ी लागत भी बढ़ी है। इसी वजह से सरकार के स्तर पर UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए अलग-अलग विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
दो विकल्पों पर हो रहा विचार
UPI व्यवस्था की लागत को संभालने के लिए दो संभावित मॉडल चर्चा में हैं।
1. बड़े कारोबारियों पर सीमित MDR:
एक प्रस्ताव के तहत ₹2,000 से अधिक के कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर करीब 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक MDR लगाया जा सकता है। इसका दायरा बड़े कारोबारियों तक सीमित रखने की बात कही गई है, जिनका सालाना कारोबार ₹1.5 करोड़ से अधिक है।
2. टियर आधारित इंसेंटिव व्यवस्था:
दूसरे विकल्प में UPI लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा सरकारी प्रोत्साहन व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से बदला जा सकता है। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान नेटवर्क को लंबे समय में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।
आम लोगों और छोटे दुकानदारों पर क्या होगा असर?
प्रस्तावित व्यवस्था में व्यक्तिगत स्तर पर होने वाले UPI भुगतान को शुल्क से बाहर रखने की बात है। यानी दोस्तों या परिवार के बीच पैसे भेजने जैसे P2P ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं होगा।
छोटे दुकानदारों, जैसे किराना दुकान, चाय की दुकान या सब्जी विक्रेता को QR कोड के जरिए भुगतान स्वीकार करने पर भी शुल्क नहीं लगाने की व्यवस्था बनाए रखने का प्रस्ताव है।
वहीं, बड़े मॉल, शोरूम और बड़े ऑनलाइन कारोबारियों से जुड़े पात्र लेनदेन पर MDR लागू किए जाने की संभावना है।
UPI के खर्च को लेकर क्यों उठी चर्चा?
UPI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के साथ इसके संचालन, नेटवर्क विस्तार, साइबर सुरक्षा और फ्रॉड रोकने के लिए लगातार निवेश की जरूरत होती है। इसी कारण सरकार और डिजिटल पेमेंट क्षेत्र के बीच ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर चर्चा हो रही है जिससे इन खर्चों का प्रबंधन किया जा सके और छोटे कारोबारियों व आम ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
क्या है MDR?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले पात्र व्यापारी से भुगतान प्रणाली से जुड़े पक्षों को मिल सकता है। प्रस्तावित मॉडल में इसका भार आम ग्राहक के बजाय निर्धारित बड़े कारोबारियों पर डालने की बात है।
हालांकि, इन विकल्पों पर विचार किए जाने का मतलब यह नहीं है कि सभी प्रस्तावित नियम तुरंत लागू हो गए हैं। अंतिम व्यवस्था और उसके लागू होने की शर्तों को लेकर सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा।
