Friday, August 14, 2026

कुड़माली को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग, चार सांसदों ने अमित शाह को सौंपा ज्ञापन.

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जमशेदपुर: कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर जमशेदपुर के सांसद विद्युतवरण महतो समेत चार सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। सांसदों ने गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

सांसदों का कहना है कि कुड़माली केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि बड़ी आबादी की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हुई है। लंबे समय से इसे आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की जा रही है।

झारखंड समेत कई राज्यों में कुड़माली का व्यापक इस्तेमाल

सांसदों ने बताया कि पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर समेत जंगलमहल क्षेत्र में कुड़माली बोलने वालों की बड़ी संख्या है।

झारखंड में रांची, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, गिरिडीह, जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां जैसे क्षेत्रों में भी इसका व्यापक उपयोग होता है। वहीं ओडिशा के मयूरभंज, क्योंझर और सुंदरगढ़ में भी कुड़माली भाषी समुदाय मौजूद है।

गृह मंत्री के समक्ष रखी गई मांग

प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री से कुड़माली को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल करने का अनुरोध किया। सांसदों के मुताबिक, गृह मंत्री ने मांग को गंभीरता से सुना और इसे व्यापक जनहित से जुड़ा विषय बताया।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश की विभिन्न भाषाओं और उनके साहित्य के संरक्षण एवं विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सांसदों के अनुसार, कुड़माली सहित कुछ अन्य भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने से जुड़े विषय भी विचाराधीन हैं।

भाषा और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा बढ़ावा

कुड़माली की अपनी साहित्यिक और मौखिक परंपरा है। लोकगीत, लोककथाएं और कविताएं इसकी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। झुमर, टुसू और करम जैसी लोक परंपराओं से भी इसका संबंध बताया जाता है।

सांसदों का मानना है कि आठवीं अनुसूची में स्थान मिलने से कुड़माली भाषा के संरक्षण, अध्ययन और शोध को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे भाषा से जुड़ी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को भी संस्थागत स्तर पर बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

प्रतिनिधिमंडल में चार सांसद शामिल

अमित शाह से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में जमशेदपुर के सांसद विद्युतवरण महतो, पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, गिरिडीह के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और राज्यसभा सांसद खीरू महतो शामिल थे।

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