नई दिल्ली: बिहार के प्रसिद्ध ‘मिथिला मखाना’ ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, बिहार से पहली बार 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना समुद्री रास्ते से ऑस्ट्रेलिया भेजा गया है। इस निर्यात में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की भी भूमिका रही।
सबसे खास बात यह है कि इस खेप के लिए मखाना दरभंगा क्षेत्र के स्थानीय किसानों से सीधे खरीदा गया। बताया गया है कि निर्यात के कारण किसानों को घरेलू बाजार में मिलने वाले दाम की तुलना में करीब 18 प्रतिशत अधिक आय प्राप्त हुई।
कनाडा के बाद ऑस्ट्रेलिया में भी बढ़ी पहुंच
मिथिला मखाना के लिए यह लगातार दूसरी बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि मानी जा रही है। इससे पहले बिहार से कनाडा के लिए 7 मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाने की पहली समुद्री खेप भेजी गई थी। मूल्य-वर्धित उत्पाद के रूप में निर्यात किए गए इस मखाने से किसानों को स्थानीय बिक्री के मुकाबले 50 प्रतिशत से अधिक बेहतर कीमत मिलने की जानकारी सामने आई थी।
कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में निर्यात की इन घटनाओं से बिहार के पारंपरिक मखाना उत्पाद को विदेशी बाजारों में नई पहचान मिल रही है।
सीधे किसानों से खरीद पर जोर
निर्यात मॉडल की एक अहम विशेषता किसानों से सीधी खरीद है। APEDA के सहयोग से उत्पादकों से मखाना खरीदे जाने से आपूर्ति श्रृंखला में बिचौलियों की भूमिका कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिलने वाली बेहतर कीमत का बड़ा हिस्सा उत्पादकों तक पहुंचने की संभावना बढ़ती है।
इस तरह की व्यवस्था मखाना किसानों को उत्पादन बढ़ाने और बेहतर गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। साथ ही, इससे मिथिलांचल में मखाना आधारित कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
समुद्री निर्यात से घट सकती है लॉजिस्टिक्स लागत
ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे लंबी दूरी वाले बाजारों तक खाद्य उत्पाद पहुंचाने में परिवहन लागत एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में समुद्री मार्ग का इस्तेमाल लागत को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
मखाने की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग के बीच समुद्री निर्यात भारतीय उत्पादकों और निर्यातकों के लिए नए बाजार खोल सकता है। खासकर हेल्दी और पोषक स्नैक्स की वैश्विक मांग बढ़ने के साथ मिथिला मखाना इस श्रेणी में अपनी जगह मजबूत कर सकता है।
बिहार में प्रोसेसिंग उद्योग को मिल सकता है फायदा
विदेशी बाजारों में बढ़ती पहुंच का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। मखाना की सफाई, प्रोसेसिंग, फ्लेवरिंग, पैकेजिंग और अन्य वैल्यू-एडेड उत्पादों से जुड़े कारोबार में भी निवेश बढ़ सकता है।
GI टैग वाले मिथिला मखाना की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होने से बिहार के मखाना उत्पादकों और इससे जुड़े छोटे कारोबारों को नए अवसर मिल सकते हैं। आने वाले समय में निर्यात बढ़ता है तो मिथिलांचल का मखाना घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक हेल्दी स्नैक बाजार में भी अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
