पलामू (मेदिनीनगर): विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पलामू जिला प्रशासन की ओर से रविवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्टेशन रोड स्थित बिरसा चौक पर हुए आयोजन में उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत समेत प्रशासनिक अधिकारियों ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इस मौके पर उपायुक्त ने विश्व आदिवासी दिवस के महत्व और आदिवासी समाज के अधिकारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय की संस्कृति, भाषा, परंपरा और अधिकारों का संरक्षण बेहद जरूरी है। जिला प्रशासन इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
विश्व आदिवासी दिवस का क्या है इतिहास?
उपायुक्त ने बताया कि आदिवासी समुदायों के अधिकारों और उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से प्रयास होते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर वर्ष 1982 में आदिवासी मुद्दों से संबंधित कार्य समूह की पहली बैठक जिनेवा में हुई थी।
इसके बाद दिसंबर 1994 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाने का निर्णय लिया। पहली बार 9 अगस्त 1995 को विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन किया गया था।
अधिकारों के संरक्षण पर प्रशासन का जोर
डीसी ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस मनाने का उद्देश्य केवल आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं को याद करना नहीं है, बल्कि उनके संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय की भाषा, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रशासन की कोशिश है कि आदिवासी समाज को उनके अधिकार और सरकारी योजनाओं का उचित लाभ मिल सके।
पर्यावरण संरक्षण में आदिवासी समाज की अहम भूमिका
कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने प्रकृति संरक्षण में आदिवासी समुदाय की पारंपरिक भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी जीवनशैली लंबे समय से जंगल और प्राकृतिक संसाधनों के साथ संतुलन पर आधारित रही है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के मौजूदा दौर में आदिवासी समाज की पारंपरिक सोच और प्रकृति के प्रति उनकी संवेदनशीलता महत्वपूर्ण है।
हक और अधिकार दिलाने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध
पलामू डीसी ने कहा कि जिला प्रशासन आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा करने और उन्हें उनके अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और विरासत को सम्मान देते हुए उनके सामाजिक एवं आर्थिक विकास पर भी ध्यान देना जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और उपस्थित लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को याद किया और उनके विचारों से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।
