रांची: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर रांची विश्वविद्यालय में परीक्षा सुधार एवं शैक्षणिक मूल्यांकन समिति की बैठक आयोजित की गई। मोराबादी परिसर स्थित एकेडमिक ब्लॉक के कॉन्फेंस हॉल में हुई इस बैठक की अध्यक्षता कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति एवं समिति के अध्यक्ष प्रो. दीवान एस. रावत ने की।
बैठक में देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया। इनमें इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. गुलशन धमीजा, किरोड़ीमल कॉलेज के डॉ. अमित सुमन, आरएलएसवाई कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. विष्णु चरण महतो, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के निदेशक डॉ. टी.एन. गिरी तथा प्रो. उदयन घोष शामिल रहे। बैठक का संचालन रांची विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक एवं समिति के संयोजक डॉ. संजय सिंह ने किया।
बैठक के दौरान कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और छात्र-केंद्रित परीक्षा प्रणाली विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति की अनुशंसाएं विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएंगी।
बैठक में मौजूदा परीक्षा प्रणाली, सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (Continuous Assessment), आंतरिक मूल्यांकन और सेमेस्टर परीक्षा प्रणाली की समीक्षा की गई। विशेषज्ञों ने परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष, समयबद्ध और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई सुझाव दिए।
इसके अलावा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत आउटकम बेस्ड एजुकेशन (OBE), अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC), क्रेडिट मोबिलिटी, बहुविषयक शिक्षा और आधुनिक मूल्यांकन प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही पाठ्यक्रम में हुए बदलाव, अंक संरचना और परीक्षा संचालन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के अंत में समिति ने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी, जवाबदेह और विद्यार्थी-केंद्रित बनाया जाए, ताकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
