नई दिल्ली: टेक कंपनी Google ने अपने मैपिंग प्लेटफॉर्म Google Earth से हाल ही में जोड़ा गया AI आधारित इमेज जनरेशन फीचर फिलहाल वापस ले लिया है। यह निर्णय उस समय लिया गया जब विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और फैक्ट-चेकिंग से जुड़े लोगों ने इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं।
क्या था नया AI फीचर?
कुछ समय पहले Google Earth में एक नया AI टूल जोड़ा गया था, जिसकी मदद से उपयोगकर्ता सैटेलाइट, हवाई और 3D मैप डेटा के आधार पर नई तस्वीरें तैयार कर सकते थे। कंपनी का उद्देश्य इस तकनीक का उपयोग शहरी योजना, ऐतिहासिक दृश्यांकन और अन्य रचनात्मक कार्यों के लिए करना था।
क्यों बढ़ा विवाद?
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना था कि यह फीचर ऐसी तस्वीरें तैयार कर सकता है जो देखने में वास्तविक सैटेलाइट इमेज जैसी लगें। आशंका जताई गई कि इसका इस्तेमाल किसी क्षेत्र में काल्पनिक विस्फोट, सैन्य गतिविधि, प्राकृतिक आपदा या अन्य भ्रामक दृश्य तैयार करने के लिए किया जा सकता है, जिससे गलत सूचना फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
पत्रकारों और शोधकर्ताओं ने जताई चिंता
ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) विशेषज्ञों और खोजी पत्रकारों ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की AI जनरेटेड तस्वीरें व्यापक रूप से इस्तेमाल होने लगीं, तो वास्तविक और नकली सैटेलाइट इमेज के बीच अंतर करना कठिन हो सकता है। इससे तथ्य-जांच और स्वतंत्र जांच कार्य प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई।
Google ने दी थी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद Google ने कहा था कि AI से तैयार की गई तस्वीरों में डिजिटल वॉटरमार्क और अन्य पहचान संबंधी सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं, ताकि उन्हें वास्तविक तस्वीरों से अलग पहचाना जा सके। हालांकि, आलोचकों का मानना था कि केवल वॉटरमार्क जैसी व्यवस्था दुरुपयोग की संभावना को पूरी तरह नहीं रोक सकती।
बढ़ते दबाव के बाद हटाया गया फीचर
लगातार उठ रही आपत्तियों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच Google ने यह फीचर Google Earth से हटा दिया। कंपनी का कहना है कि भविष्य में इस सुविधा को दोबारा उपलब्ध कराने से पहले अतिरिक्त सुरक्षा उपायों और सख्त नियंत्रण तंत्र पर काम किया जाएगा।
AI के बढ़ते उपयोग के साथ नई चुनौतियां
यह घटनाक्रम एक बार फिर दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जहां नई संभावनाएं लेकर आ रहा है, वहीं इसके जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित टूल्स के विकास के साथ पारदर्शिता, सत्यापन और सुरक्षा मानकों को मजबूत करना भविष्य की बड़ी जरूरत होगी।
