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7 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में रुपया 17 पैसे कमजोर होकर 93.07 प्रति डॉलर पर आ गया. शेयर बाजार में 800 अंकों से ज्यादा की गिरावट और कच्चे तेल (Brent Crude) के $111 के पार पहुंचने से भारतीय करेंसी पर दबाव बढ़ा है.
सोमवार की मामूली बढ़त के बाद मंगलवार को रुपया शुरुआती कारोबार में ही 17 पैसे लुढ़क गया. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह 93.07 के स्तर पर पहुंच गया है. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली (निवेशकों या व्यापारियों द्वारा किसी संपत्ति (शेयर, बॉन्ड, कमोडिटी) को कम समय में बड़े पैमाने पर बेचना)और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये की सेहत बिगाड़ दी है.
क्यों गिर रहा है रुपया ?
कच्चे तेल की ‘दोहरी मार’: अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.22% बढ़कर 111.11 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतें बढ़ने से हमें डॉलर में ज्यादा भुगतान करना पड़ता है, जिससे रुपया कमजोर होता है.
शेयर बाजार में हाहाकार: मंगलवार सुबह भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई. सेंसेक्स 824 अंक टूटकर 73,282 पर, जबकि निफ्टी 248 अंक फिसलकर 22,719 के स्तर पर आ गया. जब शेयर बाजार गिरता है, तो विदेशी निवेशक अपना पैसा निकालकर बाहर ले जाते हैं, जिसका सीधा असर रुपये की वैल्यू पर पड़ता है.
डॉलर की बढ़ती ताकत: दुनिया की छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला ‘डॉलर सूचकांक’ (Dollar Index) 0.13% बढ़कर 100.11 पर पहुंच गया है. जब डॉलर खुद मजबूत होता है, तो रुपया और अन्य मुद्राएं उसके मुकाबले कमजोर पड़ जाती हैं.
विदेशी निवेशकों का पलायन: आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सोमवार को ही 8,167.17 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे. बाजार से इतनी बड़ी रकम का बाहर जाना रुपये के लिए खतरे की घंटी है.