Saturday, March 14, 2026

24 फरवरी से होलाष्टक शुरू होगा, ग्रहों की उग्रता के कारण इन 8 दिनों में शादी, गृह-प्रवेश और नए व्यापार जैसे शुभ कार्य वर्जित रहेंगे.

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नई दिल्ली: रंगों का त्योहार होली खुशियों और उमंग का प्रतीक है, लेकिन सनातन धर्म में होली से ठीक आठ दिन पहले की अवधि को ‘होलाष्टक’ कहा जाता है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील और मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित माना गया है. इस साल 24 फरवरी 2026 से होलाष्टक की शुरुआत हो रही है, जो 3 मार्च 2026 (होलिका दहन) तक जारी रहेगा.

कब से कब तक है होलाष्टक का साया?
वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक का प्रारंभ होता है. इस वर्ष अष्टमी तिथि 24 फरवरी को सुबह 07:01 बजे शुरू हो रही है. शास्त्रों के अनुसार, जब तक होलिका दहन नहीं हो जाता, तब तक के इन आठ दिनों में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रहता है.

क्यों माना जाता है इसे ‘खतरनाक’ समय?
धार्मिक मान्यताओं के पीछे एक गहरा पौराणिक और वैज्ञानिक तर्क छिपा है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार, इन आठ दिनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु जैसे आठों ग्रह उग्र और प्रतिकूल अवस्था में होते हैं. डॉ. उमाशंकर का मानना है कि ग्रहों की इस स्थिति के कारण मनुष्य की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है और मन में अशांति रहती है. इसी कारण इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता.

इसके अलावा, पौराणिक कथा के अनुसार, इन्हीं आठ दिनों के दौरान असुर राज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान की भक्ति छोड़ने के लिए कठोर यातनाएं दी थीं. अंततः फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठी थी. प्रह्लाद की उन पीड़ाओं के कारण भी इन दिनों को शुभ नहीं माना जाता.

होलाष्टक में क्या ‘बिल्कुल न करें’?
होलाष्टक के दौरान शास्त्रों ने स्पष्ट रूप से कुछ कार्यों पर पाबंदी लगाई है:

मांगलिक कार्य: विवाह, सगाई (रोका), मुंडन, नामकरण और यज्ञोपवीत जैसे 16 संस्कारों पर रोक रहती है.

नया निवेश व व्यापार: नया बिजनेस शुरू करना या दुकान का उद्घाटन करना घाटे का सौदा साबित हो सकता है.

गृह प्रवेश व निर्माण: नए घर की नींव रखना या गृह प्रवेश करना अशुभ माना जाता है.

बड़ी खरीदारी: सोना-चांदी, वाहन या प्रॉपर्टी की डील इन दिनों टाल देना ही बेहतर है.

क्या करें इन 8 दिनों में?
हालांकि यह समय नए कामों के लिए बुरा है, लेकिन आध्यात्मिक साधना के लिए यह ‘स्वर्ण काल’ है. इन दिनों में:

  • अपने इष्ट देव का ध्यान और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें.
  • मन को शांत रखने के लिए भजन-कीर्तन में समय बिताएं.

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