नई दिल्ली: भारत में साल 2026 की गर्मियां उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु क्षेत्र, विशेष रूप से कूलिंग उत्पादों जैसे एयर कंडीशनर, एयर कूलर और पंखों के लिए एक बड़े बदलाव का साल साबित हो सकती हैं. ‘आनंद राठी रिसर्च’ की एक नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में ‘अल नीनो’ के दोबारा उभरने की प्रबल संभावना है, जिससे देश में भीषण और लंबी गर्मी पड़ सकती है. यह स्थिति कूलिंग सेक्टर के लिए एक ‘साइक्लिक अपटर्न’ यानी तेजी का दौर लेकर आएगी.
2025 की सुस्ती के बाद बड़ी वापसी
रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2025 में बेमौसम बारिश और उतार-चढ़ाव वाले मौसम के कारण कूलिंग उत्पादों की मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी. कम बिक्री के कारण कंपनियों के पास इन्वेंट्री जमा हो गई थी. हालांकि, 2026 में समय से पहले शुरू होने वाली और तीव्र गर्मी इस सुस्ती को खत्म कर सकती है. गर्मी का लंबा सीजन कंपनियों की कमाई और उनके मुनाफे को बढ़ाने में मददगार साबित होगा.
मांग बढ़ने के मुख्य कारण
- कम पहुंच: भारत में अभी भी केवल 8-10 प्रतिशत घरों में ही एसी का इस्तेमाल होता है. यह कम आंकड़ा भविष्य में विकास की अपार संभावनाओं को दर्शाता है.
- छोटे शहरों का योगदान: टियर-2 और टियर-3 शहरों में कूलिंग उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है.
- प्रीमियम मॉडल्स की मांग: रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता अब साधारण मॉडल्स के बजाय ऊर्जा की बचत करने वाले ‘इन्वर्टर एसी’ और प्रीमियम उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं.
- रिप्लेसमेंट डिमांड: पुराने उपकरणों को बदलकर नए और आधुनिक फीचर्स वाले कूलिंग सिस्टम लेने का चलन भी मांग को मजबूती दे रहा है.
कीमतों और मुनाफे पर असर
भीषण गर्मी के कारण जब मांग चरम पर होगी, तो कंपनियां तांबे की बढ़ती कीमतों और विदेशी मुद्रा विनिमय के दबाव के बावजूद कीमतों में वृद्धि कर पाएंगी. इससे कंपनियों की परिचालन क्षमता में सुधार होगा. रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि 2026 की गर्मियां इस पूरे सेक्टर के लिए एक ‘इन्फ्लेक्शन पॉइंट’ साबित हो सकती हैं, जो कंपनियों के रिटर्न अनुपात और बाजार मूल्यांकन को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती हैं.
भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमानों ने भी इस गर्मी के गंभीर होने के संकेत दिए हैं, जिससे निवेशकों और निर्माताओं दोनों की नजरें अब आगामी सीजन पर टिकी हैं.


