मुजफ्फरपुर समेत बिहार के विभिन्न जेलों में 20 साल से अधिक सजा काट रहे 17 कैदियों को रिहा किया जाएगा। विधि विभाग के सचिव ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। मुजफ्फरपुर के खुदीराम बोस केंद्रीय कारागार का एक कैदी भी रिहा होगा जिसे हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी। रिहाई से पहले सभी कैदियों का सत्यापन किया जाएगा।
मुजफ्फरपुर। परिहार अवधि समेत 20 वर्ष की सजा काट चुके राज्य के विभिन्न कारा में बंद 17 बंदियों को रिहा किया जाएगा।विधि विभाग के सचिव अंजनी कुमार सिंह ने उक्त आदेश जारी करते हुए सभी संबंधित जिलाधिकारी व काराधीक्षकों को इससे अवगत कराया है। सभी बंदियों का विस्तृत ब्योरा भी उपलब्ध कराया गया है।इसमें मुजफ्फरपुर स्थित खुदीराम बोस केंद्रीय कारा का भी एक बंदी शामिल है। वह मधुबनी जिले का सतन महतो (58) है। हत्या के एक मामले में वह आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है।
काराधीक्षक बृजेश सिंह मेहता ने बताया कुछ कागजी प्रक्रिया पूरी की जानी है। अगले सप्ताह में उसे रिहा किया जाएगा। आदेशानुसार उक्त बंदी को दो वर्ष तक प्रत्येक माह संबंधित थाने पर हाजिरी लगानी होगी।विदित हो कि आजीवन कारावास मामले में 14 वर्ष संसीमन की सजा अवधि के साथ छह वर्ष परिहार अवधि काटने वाले बंदियों की रिहाई की जाती है।
विधि विभाग के सचिव ने कारा मुक्त करने से पहले बंदियों का पूर्ण रूप से सत्यापन करने का निर्देश दिया है। इसके लिए नियमानुसार संसीमन अवधि पूर्ण होने पर परिहार की जांच करेंगे। काराधीक्षक पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही बंदियों की रिहाई करेंगे।
इन कारा से मुक्त होंगे बंदी
खुदीराम बोस केंद्रीय कारा मुजफ्फरपुर से एक बंदी, भागलपुर से दो बंदी, मंडल कारा भभुआ से एक, मुक्त कारागार बक्सर से चार बंदी, केंद्रीय कारा मोतिहारी से एक, केंद्रीय कारा पूर्णिया से एक, मंडल कारा सहरसा से चार, आदर्श केंद्रीय कारा बेउर से एक, विशेष केंद्रीय कारा भागलपुर से दो बंदियों को रिहा किया जाएगा।


