Friday, March 13, 2026

19 मार्च से चैती नवरात्र और हिंदू नव वर्ष का आरंभ होगा, इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करेंगे।

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19 मार्च से चैती नवरात्र और हिंदू नव वर्ष का आरंभ होगा। इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करेंगे। 27 मार्च को रामनवमी और महानवमी मनाई जाएगी। चैती छठ महापर्व 22 मार्च से शुरू होकर 25 मार्च को समाप्त होगा। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त भी बताए गए हैं।

पटना। होली के बाद बासंती नवरात्र चैती नवरात्र, चैती छठ और रामनवमी पर्व का इंतजार श्रद्धालुओं को है। चैती नवरात्र 19 मार्च को कलश स्थापना के साथ आरंभ हो जाएगा। ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा ने पंचागों के हवाले से बताया कि चैती नवरात्र के साथ ही सनातन धर्मावलंबियों के नव संवत्सर 2083, हिंदू नव वर्ष का भी आगाज होगा।

चैती नवरात्र उत्तर भाद्रपद नक्षत्र व शुक्ल योग के सुयोग में शुरू होगा। नवसंवत्सर के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे। नवरात्र को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक, आत्मशुद्धि व मुक्ति का आधार माना गया है। देवी उपासक 19 मार्च को कलश स्थापना कर नौ दिनों तक मां दुर्गा की भक्ति में लीन रहेंगे।

28 मार्च को विजयादशमी के साथ नवरात्र का समापन होगा। नवरात्र के दौरान ग्रह-गोचरों का उत्तम संयोग बना रहेगा। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा करेंगे। देवी मां की कृपा पाने हेतु लोग दुर्गा सप्तशती, कील, कवच, अर्गला, दुर्गा चालीसा, बीज मंत्र का जाप, भगवती पुराण आदि का पाठ करेंगे।

पुष्य नक्षत्र के सुयोग में 27 को महानवमी

चैत्र शुक्ल नवमी 27 मार्च शुक्रवार को पुनर्वसु उपरांत पुष्य नक्षत्र के सुयोग में महानवमी का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन श्रद्धालु देवी दुर्गा के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा कर विशिष्ट भोग अर्पण, दुर्गा पाठ का समापन, हवन, कन्या पूजन व पुष्पांजलि करेंगे।

इस दिन रामनवमी का व्रत, ध्वज पूजन व शोभायात्रा निकलेगी। घरों से लेकर मंदिरों में भगवान श्रीराम का पूजन विधि-विधान के साथ होगा।

पुष्य नक्षत्र का संबंध माता लक्ष्मी से होने से इस दिन भूमि-भवन की ख़रीदारी, पूंजी निवेश, व्यवसाय या नौकरी की शुरुआत, वाहन, रत्न व आभूषण की खरीदी करना उत्तम रहेगा। 28 मार्च शनिवार को चैत्र शुक्ल विजयादशमी में देवी की विधिवत विदाई, जयंती धारण कर नवरात्र व रामनवमी व्रतधारी पारण करेंगे।

22 मार्च से शुरू होगा चैती छठ

चैत्र शुक्ल चतुर्थी 22 मार्च रविवार को भरणी नक्षत्र व वैधृति योग में नहाय-खाय के साथ चैती छठ का महापर्व शुरू होगा। व्रती गंगा स्नान कर अरवा चावल, चना दाल, कद्दू की सब्जी, आंवले की चासनी आदि ग्रहण कर चार दिवसीय इस महापर्व का संकल्प लेंगी।

23 मार्च सोमवार को कृत्तिका नक्षत्र व सर्वार्थ सिद्धि योग में व्रती पूरे दिन उपवास कर संध्या काल में खरना की पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करेंगी। इसी के साथ व्रतियों का 36 घंटे निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा।

चैत्र शुक्ल षष्ठी 24 मार्च मंगलवार को अस्ताचगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। 25 मार्च को सप्तमी तिथि में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर इस सूर्योपासना के महापर्व का समापन हो जाएगा।

देवी के प्रिय रंगों के अनुसार पूजा

चैत नवरात्र में नौ दुर्गा के प्रिय रंगों के अनुसार उनकी विशेष पूजा होगी। माता शैलपुत्री को पीले रंग का वस्त्र, फल, चंदन, पुष्प से पूजन होगा।

मां ब्रह्मचारिणी को हरा रंग, देवी चंद्रघंटा को पीला व हरा रंग, कुष्मांडा माता को नारंगी रंग, स्कंदमाता को श्वेत रंग, देवी कात्यायनी को लाल रंग, माता कालरात्रि को नीला रंग, महागौरी को गुलाबी रंग तथा देवी में नौवे स्वरूप में मां सिद्धिदात्री को बैगनी रंग के वस्त्र, पुष्प, अबीर, चंदन एवं फल का भोग अर्पित होगा।

सभी प्रमुख मंदिरों में होंगे विशेष पूजा

चैत्र नवरात्र में राजधानी के सभी प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना किया जाएगा। मंदिरों के कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती का पाठ, कन्या पूजन, सामूहिक शांति हवन, हनुमत ध्वज की स्थापना विधि-विधान से होगा।

महावीर मंदिर, बांसघाट काली मंदिर, पटनदेवी मंदिर, शीतला मंदिर, विजय राघव मंदिर, मनोकामना मंदिर, सर्वसिद्धि दुर्गा मंदिर, बोरिंग रोड चौराहा के शिव मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, राजपुल के प्रणामी मंदिर, राजीव नगर के बालाजी मंदिर, कदमकुआं के देवी मंदिर समेत सभी मंदिरो में विशेष आयोजन होंगे।

कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त

  • प्रतिपदा तिथि: प्रातः 06:51 बजे से पूरे दिन
  • गुली काल मुहूर्त: सुबह 09:06 बजे से 10:33 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:38 बजे से 12:24 बजे तक
  • चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: सुबह 10:33 बजे से शाम 02: 57 बजे तक

माह के प्रमुख व्रत-त्योहार:

  • 19 मार्च: नव संवत्सर, हिन्दू नववर्ष व चैत्र नवरात्र का आरंभ
  • 22 मार्च: चैती छठ का नहाय-खाय
  • 23 मार्च: खरना
  • 24 मार्च: सायंकालीन अर्घ्य
  • 25 मार्च: उदीयमान सूर्य को अर्घ्य व पारण
  • 26 मार्च: वासंतिक नवरात्र का महाष्टमी व्रत
  • 27 मार्च: महानवमी व्रत, हवन व कन्या पूजन
  • 27 मार्च: रामनवमी व ध्वज पूजन
  • 28 मार्च: विजयादशमी
  • 29 मार्च: कामदा एकादशी
  • दो अप्रैल: पूर्णिमा व्रत

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