Monday, August 10, 2026

12 अगस्त को आसमान में दिखेगा दुर्लभ खगोलीय संयोग, सूर्य ग्रहण से लेकर पर्सिड उल्का बौछार तक कई घटनाएं.

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हैदराबाद: अगस्त 2026 का मध्य खगोल विज्ञान में दिलचस्प घटनाओं के लिए खास रहने वाला है। 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण और अमावस्या के साथ पर्सिड उल्का बौछार का चरम समय आसपास पड़ रहा है। इसी अवधि में सुबह के आकाश में कई ग्रहों को एक साथ देखने का मौका भी मिल सकता है।

हालांकि, इन सभी घटनाओं को एक ही स्थान से देख पाना संभव नहीं होगा। खास तौर पर 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। वहीं पर्सिड उल्का बौछार का आनंद साफ और अंधेरे आसमान वाले स्थानों से रात के समय लिया जा सकेगा।

सुबह के आकाश में ग्रहों का जमावड़ा

12 अगस्त की सुबह सूर्योदय से पहले आसमान में कई ग्रह एक साथ नजर आ सकते हैं। इस तरह की स्थिति को आम तौर पर ‘प्लैनेट परेड’ कहा जाता है, हालांकि यह कोई औपचारिक खगोलीय शब्द नहीं है।

बुध, मंगल, बृहस्पति, शनि और कुछ बाहरी ग्रहों की स्थिति इस अवधि में आकाश को खास बना सकती है। इनमें चमकीले ग्रहों को बिना किसी विशेष उपकरण के देखना आसान हो सकता है, जबकि बेहद दूर स्थित और कम चमकीले ग्रहों के लिए दूरबीन की जरूरत पड़ सकती है।

ग्रहों का वास्तविक दृश्य स्थान और समय के अनुसार बदल सकता है, इसलिए किसी विशेष शहर से देखने के लिए स्थानीय खगोलीय चार्ट की मदद लेना बेहतर रहेगा।

12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा

12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण भी होने वाला है। यह ग्रहण दुनिया के कुछ उत्तरी हिस्सों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन के कुछ क्षेत्रों सहित उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में इसका अलग-अलग स्तर पर दृश्य देखा जा सकेगा।

भारत में इस सूर्य ग्रहण के दिखाई देने की उम्मीद नहीं है। इसका कारण यह है कि भारत से दिखाई देने वाले समय में सूर्य क्षितिज के नीचे होगा। इसलिए देश में रहने वाले लोगों को ग्रहण का प्रत्यक्ष दृश्य नहीं मिल पाएगा।

अमावस्या बनाएगी रात के आसमान को ज्यादा अंधेरा

सूर्य ग्रहण अमावस्या की स्थिति में ही होता है। इस बार अमावस्या और सूर्य ग्रहण एक ही खगोलीय घटनाक्रम का हिस्सा हैं। अमावस्या के कारण रात में चांदनी बहुत कम या लगभग न के बराबर रहेगी।

यह स्थिति उन लोगों के लिए खास है जो रात में तारों और उल्काओं का अवलोकन करना चाहते हैं। कम चांदनी का मतलब है कि आसमान में दिखाई देने वाली हल्की रोशनी वाली उल्काओं को देखने में अपेक्षाकृत कम बाधा होगी।

पर्सिड उल्का बौछार का मिलेगा बेहतर नजारा

2026 में पर्सिड उल्का बौछार का चरम 12 और 13 अगस्त की रात के आसपास रहने वाला है। इस बार इसका पीक अमावस्या के साथ पड़ रहा है, जिससे अंधेरे आसमान में उल्काओं को देखने की परिस्थितियां काफी अच्छी रहने की उम्मीद है।

पर्सिड उल्काएं धूमकेतु 109P/Swift-Tuttle से पीछे छूटे मलबे के बीच से पृथ्वी के गुजरने के कारण दिखाई देती हैं। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय ये छोटे कण तेजी से गर्म होकर चमकीली लकीरों के रूप में नजर आते हैं।

अच्छे और प्रदूषण रहित अंधेरे आसमान में इस साल प्रति घंटे दर्जनों उल्काएं दिखाई दे सकती हैं। कुछ परिस्थितियों में यह संख्या 100 के आसपास भी पहुंच सकती है, हालांकि वास्तविक संख्या स्थान, मौसम और देखने की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

12-13 अगस्त की रात खगोल प्रेमियों के लिए खास

पर्सिड उल्का बौछार का सबसे अच्छा समय रात के बाद के घंटों से लेकर सूर्योदय से पहले तक माना जाता है। शहरों की रोशनी से दूर साफ आसमान वाला स्थान चुनने पर उल्काओं को देखने की संभावना बढ़ जाती है।

इस बार अमावस्या के कारण चांदनी का हस्तक्षेप बेहद कम रहेगा। यही वजह है कि 2026 का पर्सिड सीजन खगोल प्रेमियों के लिए विशेष माना जा रहा है।

इस तरह 12 अगस्त के आसपास सूर्य ग्रहण, अमावस्या, ग्रहों की विशेष स्थिति और पर्सिड उल्का बौछार जैसे कई खगोलीय घटनाक्रम एक ही अवधि में नजर आएंगे। हालांकि इनका दृश्य अलग-अलग समय और स्थानों पर निर्भर करेगा, फिर भी यह सप्ताह आसमान पर नजर रखने वालों के लिए साल के सबसे दिलचस्प समय में से एक साबित हो सकता है।

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