नई दिल्ली: भारत में सोने के निवेश को लेकर एक बड़ा नीतिगत बदलाव होने जा रहा है. सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) स्कीम के तहत टैक्स छूट के नियमों में संशोधन किया है, जिसका सीधा असर उन निवेशकों पर पड़ेगा जो स्टॉक एक्सचेंज के जरिए सोना खरीदते हैं. बजट 2025-26 में पेश किए गए इन बदलावों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB पर मिलने वाली टैक्स छूट खत्म कर दी गई है.
क्या है नया नियम?
अभी तक के नियमों के मुताबिक, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को मैच्योरिटी (8 साल) तक रखने पर होने वाले कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था, चाहे आपने उसे सीधे सरकार से खरीदा हो या स्टॉक एक्सचेंज से. लेकिन नए नियम के तहत, अब टैक्स-फ्री मैच्योरिटी का लाभ केवल उन ‘मूल निवेशकों’ को मिलेगा जिन्होंने प्राथमिक निर्गम (Primary Issue) के दौरान सीधे आरबीआई (RBI) के माध्यम से बॉन्ड सब्सक्राइब किए थे.
एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि कोई निवेशक 1 अप्रैल 2026 के बाद सेकेंडरी मार्केट (NSE/BSE) से SGB खरीदता है या उसे किसी से उपहार के रूप में प्राप्त करता है, तो मैच्योरिटी पर होने वाले मुनाफे को ‘टैक्स-फ्री’ नहीं माना जाएगा.
निवेशकों पर वित्तीय प्रभाव
इस बदलाव से निवेशकों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा. इसे एक उदाहरण से समझें: यदि आपने एक्सचेंज से एक बॉन्ड ₹7,000 में खरीदा और मैच्योरिटी पर उसकी कीमत ₹11,000 हो गई, तो ₹4,000 का जो मुनाफा होगा, उस पर अब 12.5% की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लगेगा. यानी आपको प्रति बॉन्ड ₹500 का टैक्स सरकार को देना होगा. पहले यह पूरी राशि निवेशक की जेब में जाती थी.
दो श्रेणियों में बंटे निवेशक
इस नियम ने गोल्ड बॉन्ड निवेशकों को दो श्रेणियों में बांट दिया है:
- प्राइमरी निवेशक: इन्हें सालाना 2.5% ब्याज के साथ-साथ मैच्योरिटी पर पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न मिलेगा.
- सेकेंडरी मार्केट खरीदार: इन्हें 2.5% ब्याज तो मिलेगा, लेकिन मैच्योरिटी के मुनाफे पर टैक्स चुकाना होगा.
निवेश की रणनीति पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से सेकेंडरी मार्केट में SGB की लिक्विडिटी और आकर्षण कम हो सकता है. अब तक निवेशक अक्सर एक्सचेंज पर रियायती दरों (Discounted Rates) पर बॉन्ड खरीदकर टैक्स-फ्री मुनाफे की रणनीति अपनाते थे, जो अब प्रभावी नहीं रहेगी.


