नई दिल्ली: अगर आप शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) के जरिए कमाई की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खबर है. केंद्र सरकार द्वारा बजट 2026-27 में घोषित किए गए नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होने जा रहे हैं. इन बदलावों के तहत सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में भारी बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा असर रिटेल ट्रेडर्स के मुनाफे पर पड़ेगा.
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार और बाजार नियामक सेबी (SEBI) पिछले काफी समय से डेरिवेटिव मार्केट (F&O) में बढ़ती सट्टेबाजी को लेकर चिंतित थे. रेवेन्यू सेक्रेटरी अरविंद श्रीवास्तव ने आज तक को दिए एक बयान में बताया कि, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में ट्रांजैक्शन की मात्रा बहुत अधिक है, जो बड़े पैमाने पर ‘सट्टेबाजी’ की ओर इशारा करती है. सेबी की एक हालिया स्टडी में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि F&O सेगमेंट में ट्रेड करने वाले 10 में से 9 निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इसी जोखिम को कम करने और छोटे निवेशकों को सुरक्षित करने के लिए टैक्स बढ़ाने का कदम उठाया गया है.
कितना बढ़ेगा टैक्स का बोझ?
1 अप्रैल से लागू होने वाली नई दरों के अनुसार
- फ्यूचर्स: इस पर लगने वाला STT 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया है. यानी सीधे तौर पर टैक्स में ढाई गुना की बढ़ोतरी.
- ऑप्शंस प्रीमियम: ऑप्शन प्रीमियम पर लगने वाला टैक्स 0.1 फीसदी से बढ़कर 0.15 फीसदी हो जाएगा.
- ऑप्शंस एक्सरसाइज: इसे 0.125 फीसदी से बढ़ाकर 0.15 फीसदी कर दिया गया है.
निवेशकों पर क्या होगा असर?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बढ़ोतरी से ‘इंट्राडे’ और ‘स्कैल्पिंग’ करने वाले ट्रेडर्स को सबसे ज्यादा चोट पहुंचेगी. टैक्स बढ़ने से ‘ब्रेक-ईवन पॉइंट’ ऊपर चला जाएगा, जिसका मतलब है कि ट्रेडर्स को मुनाफा कमाने के लिए बाजार में और ज्यादा उतार-चढ़ाव या बड़ी चाल की जरूरत होगी. छोटे मुनाफे लेकर निकलने वाले ट्रेडर्स का अधिकांश हिस्सा अब टैक्स और ब्रोकरेज की भेंट चढ़ जाएगा.
बाजार का नजरिया
एक्सपर्ट्स के अनुसार यह कदम कैश मार्केट (इक्विटी) के लिए सकारात्मक हो सकता है, क्योंकि ट्रेडिंग महंगी होने से निवेशक सट्टेबाजी छोड़कर लंबे समय के निवेश की ओर रुख कर सकते हैं. सरकार का स्पष्ट संदेश है कि शेयर बाजार को जुए का अड्डा नहीं, बल्कि निवेश का माध्यम बनाया जाए.


