Thursday, March 26, 2026

हेमंत कैबिनेट से पेसा नियमावली को मंजूरी मिलने से झारखंड में उत्साह का माहौल है.

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रांची: हेमंत कैबिनेट द्वारा पेसा नियमावली को मंजूरी प्रदान किये जाने के बाद बुधवार को झारखंड में जश्न मनाया गया. रांची के बरियातू स्थित पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के आवास पर जनजातीय समुदाय के लोगों ने ढोल नगाड़े की थाप पर जमकर नृत्य किया और एक दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी. इस दौरान राज्य की पूर्व पंचायत निदेशक एवं आईआरएस अधिकारी निशा उरांव भी उत्साहित दिखीं.

दरअसल, पूर्व पंचायती राज निदेशक रहते हुए निशा उरांव के कार्यकाल में ही ‘पेसा नियमावली’ का ड्राफ्ट तैयार किया गया था. निशा उरांव, राज्य की पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव की बेटी हैं और फिलहाल रांची में इनकम टैक्स विभाग में उच्च अधिकारी हैं. इस मौके पर निशा उरांव ने कहा कि 1996 में संसद से पारित पेसा कानून में जो प्रावधान है, वह अब धरातल पर उतरेगा.

झारखंड में लंबे इंतजार के बाद कैबिनेट से पेसा नियमावली पारित हो जाने के बाद खुशी साझा करते हुए निशा उरांव ने बताया कि बहुत लंबे इंतजार के बाद पेसा नियमावली, राज्य में लागू हुई है और अब कागज में जो संवैधानिक अधिकार आदिवासी समाज के थे वह अब जमीन पर उतरेगा. हम सबको इसका बेसब्री से इंतजार था, इसलिए आज हम अलग-अलग समाज के लोग मिलकर एक साथ खुशियां मना रहे हैं क्योंकि यह उत्सव मनाने का दिन है.

निशा उरांव ने आगे कहा कि पेसा कानून दो पेज का कानून है लेकिन वह किस प्रक्रिया के तहत राज्य में जमीन पर उतारा जाएगा? यह इस नियमावली से ही तय होगा. निशा उरांव ने बताया कि जब मैं पंचायत निदेशक के रूप में पेसा कानून के नियमावली ड्राफ्ट में थी और उसे पहली बार प्रकाशित किया गया था, मुझे लगा कि इसमें जिस समाज के लिए नियमावली बनाई जा रही है, उनके भी विचार समाहित होने चाहिए, उनकी आकांक्षाओं को भी उसमें समाहित किया जाना चाहिए. यह सोचकर कई कार्यशाला आयोजित किए गए, सुझाव आमंत्रित किए गए और जो परामर्श मिले, उनमें से कई को नियमावली में जगह दी गई.

पेसा कानून से आदिवासियों की जमीन और संसाधनों की होगी रक्षा: रामेश्वर उरांव

वहीं पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि आज ही के दिन यानी 24 दिसंबर 1996 को केंद्र सरकार ने पेसा कानून बनाया था. इसमें अफसोस रहा कि झारखंड में आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के बावजूद यह कानून रुका हुआ था. रामेश्वर उरांव ने कहा कि मुझे याद है कि 2014-15 में बीजेपी की सरकार थी, उसी समय केंद्र से मॉडल रूल बनकर आया था लेकिन उस समय कुछ नहीं हुआ. वर्तमान सरकार में भी देरी हुई है. राज्य सरकारों की ये जिम्मेदारी तो बनती थी कि नियमावली बनाकर जल्द से जल्द पेसा कानून को यहां लागू किया जाए लेकिन इसमें देरी हुई.

पूर्व मंत्री ने आगे कहा कि कल सरकार ने नियमावली को कैबिनेट से पारित कर दिया और इसके लागू होने से जनजातीय क्षेत्र में जमीन और संसाधनों की रक्षा होगी. यही तो दोनों चीज आदमी को चाहिए, खासकर आदिवासियों को चाहिए कि उनकी जमीन बची रहे और उनके जो रिसोर्सेज हैं, वह भी बचे रहे.

इसके साथ ही लोहरदगा से पेसा कानून नियमावली लागू होने की खुशियां मनाने रांची पहुंचे आदिवासी सोमेश उरांव ने बताया कि कितने सालों के संघर्ष के बाद यह मौका आया है, बहुत संघर्ष किया इसके लिए और संघर्ष करते-करते आज हमें पेसा कानून नियमावली मिली है, यह आदिवासियों के लिए खुशी का पल है और यह हम सब झारखंड के आदिवासियों के लिए खुशी का दिन है. अब ग्राम सभा को अधिकार मिलेगा तथा कानून का राज होगा.

24 दिसंबर 1996 को संसद से पास हुआ था पेसा कानून

बता दें कि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों को ग्राम सभाओं के जरिए शासन से सशक्त बनाने के लिए झारखंड समेत देश के 10 राज्यों के लिए पेसा (Panchayats Extension to Scheduled Areas) कानून 24 दिसंबर 1996 को लागू किया गया था. इन दस राज्यों में झारखंड और ओडिशा को छोड़कर शेष आठ राज्य तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश ने अपने-अपने राज्य में इसे लागू कर दिया था.

दरअसल झारखंड सरकार पर लगातार केंद्र सरकार और झारखंड हाईकोर्ट की ओर से पेसा कानून को लागू करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था. आखिरकार लंबे इंतजार के बाद राज्य के 15 अनुसूचित जिलों में स्थानीय शासन की दिशा में हेमंत सरकार ने पेसा नियमावली पर मुहर लगाकर बड़ा कदम उठाया है. कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही अधिसूचना जारी होने की संभावना है.

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