Sunday, March 29, 2026

हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का पर्व काफी धूमधाम से मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन बप्पा का धरती पर आगमन होता है.

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 गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. पंचांग के मुताबिक, इस साल, गणेश चतुर्थी 27 अगस्त 2025, बुधवार को मनाई जाएगी. बता दें कि यह पर्व 10 दिनों तक चलता है और इस दौरान भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा अपने घर में विराजित कर उनकी सेवा करते हैं. गणेश जी को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है. गणेश प्रतिमा की स्थापना से पूर्व और पूजा के दौरान कुछ बातों का पालन करना काफी जरूरी है. यदि इनको ध्यान नहीं रखा जाए, तो पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है. जानते हैं, गणेश प्रतिमा की स्थापना से जुड़े कुछ अहम बातों को.

गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त कब
पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी 26 अगस्त 2025 की दोपहर 01:54 बजे से प्रारंभ होगी और यह तिथि 27 अगस्त की दोपहर 03:44 बजे तक रहेगी. हालांकि गणेश जी की स्थापना और पूजा के लिए सबसे शुभ समय 27 अगस्त 2025 का है. इस दिन आप सुबह के समय या दोपहर में शुभ मुहूर्त में गणेश प्रतिमा घर ला सकते हैं. वहीं 6 सितंबर 2025 को अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन होगा.

गणेश स्थापना से पूर्व जान लें ये नियम
गणेश चतुर्थी पर पूजा का फल पाने के लिए गणेश प्रतिमा की स्थापना करते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है.

गणेश जी की सूंड
हमेशा ऐसी प्रतिमा लेनी चाहिए जिसमें गणेश जी की सूंड बाईं ओर मुड़ी हो. ऐसी प्रतिमा की पूजा से शीघ्र ही शुभ फल मिलता है. वहीं दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा को सिद्धिविनायक स्वरूप माना जाता है और इसकी पूजा के लिए कुछ कड़े मानक का पालन करना पड़ता है.

शुद्धता का ध्यान
इस दौरान पूजा स्थल को काफी अच्छी तरह से साफ करने के बाद गणेश प्रतिमा रखने से पहले वहां गंगाजल छिड़कें.

चौकी या आसन
गणेश प्रतिमा को सीधे जमीन पर नहीं रखें. बल्कि एक साफ चौकी या पाटे पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर ही प्रतिमा की स्थापना करें.

मिट्टी की प्रतिमा
शास्त्रों के मुताबिक मिट्टी से बनी प्रतिमा की पूजा करना काफी शुभ माना जाता है.

प्रतिमा स्थापना का मुहूर्त
गणेश जी की प्रतिमा चतुर्थी तिथि में ही स्थापित करनी चाहिए. वहीं रात में प्रतिमा स्थापना करना शुभ नहीं माना जाता है.

दिशा
गणेश जी की प्रतिमा को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित किया जाना चाहिए. यह दिशा पूजा-पाठ के हिसाब से सबसे शुभ मानी जाती है.

प्रतिमा का आकार
गणेश जी की प्रतिमा का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए. घर पर पूजा के लिए छोटी प्रतिमा ही अच्छी मानी जाती है, जिसे आसानी से विसर्जित किया जा सके.

प्रतिमा का अभिषेक और प्राण प्रतिष्ठा
प्रतिमा स्थापित करने के बाद उनका अभिषेक करना चाहिए. इसके बाद प्राण प्रतिष्ठा मंत्र का जाप करते हुए प्रतिमा में प्राण डालें. यह मंत्र पूजा को पूर्णता प्रदान करता है.

सिंदूर और दूर्वा का विशेष महत्व
गणेश जी की पूजा में सिंदूर और दूर्वा अर्पित करना काफी ज्यादा शुभ होता है.

मोदक का भोग
गणपति को मोदक का भोग लगाना जरूरी है. मान्यता यह भी है कि यह उनका सबसे प्रिय प्रसाद है.

प्रतिमा की नियमित पूजा
स्थापना के बाद दस दिनों तक पूरे विधि विधान से सुबह-शाम गणेश जी की आरती, मंत्र जाप और भोग लगाना आवश्यक है.

व्रत का पालन
भक्त इस दिन निर्जला या फलाहार का व्रत रखते हैं. इस दौरान महिलाएं विशेष रूप से परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं

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