हाई यूरिक एसिड लेवल, जिसे हाइपरयूरिसीमिया कहा जाता है, अक्सर गाउट और किडनी स्टोन से जुड़ा होता है. हालांकि, हालिया शोध बताते हैं कि बढ़ा हुआ यूरिक एसिड आंखों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है. क्रोनिक हाइपरयूरिसीमिया (शरीर में यूरिक एसिड का हाई लेवल) सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और अलग-अलग टिश्यू में मोनोसोडियम यूरेट क्रिस्टल के जमाव का कारण बन सकता है. समय के साथ, ये जमाव ड्राई आई, आंखों में सूजन, या यहां तक कि रेटिना और ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाने जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं.
यूरिक एसिड के लेवल का जल्द पता लगाना और पूरी तरह से देखरेख महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे गंभीर नेत्र संबंधी समस्याएं को रोकने और ओवरऑल आंखों और दिल के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिल सकती है. लगातार हाई लेवल ग्लूकोमा के खतरे को भी बढ़ा सकता है और आंखों में ब्लड फ्लो कम हो सकता है, जिससे लॉन्ग टर्म विजन को और भी खतरा हो सकता है.

हाई यूरिक एसिड आपकी आंखों और दृष्टि के लिए कैसे खतरा पैदा करता है?
यूरिक एसिड एक नेचुरल वेस्ट प्रोडक्ट है जो शरीर में प्यूरीन के टूटने पर बनता है. प्यूरीन रेड मीट, सी फूड्स और कुछ बीन्स जैसे खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं. यूरिक एसिड आमतौर पर पेशाब के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है. इसका मतलब है कि जब शरीर प्यूरीन को तोड़ता है, तो यूरिक एसिड बनता है और ब्लड फ्लो के माध्यम से किडनी तक पहुंचता है, जहां से यह मूत्र के माध्यम से बाहर निकल जाता है. अगर किडनी ठीक से काम नहीं करते हैं या शरीर बहुत अधिक यूरिक एसिड का प्रोडक्शन करता है, तो यूरिक एसिड खून में जमा हो सकता है. जिससे हाइपरयूरिसीमिया डेवलप हो सकता है.
अधिक यूरिक एसिड मोनोसोडियम यूरेट (MSU) क्रिस्टल बना सकता है, जो जोड़ों, किडनी और यहां तक कि आंखों के टिश्यू में जमा होकर सूजन और ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है. नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ लेवल आंखों की समस्याओं का कारण बन सकता है. जिससे आंखों की पलकें, कंजंक्टिवा, जलीय द्रव्य (aqueous liquid) और आईरिस में सूजन हो सकती है और लालिमा (redness), जलन और दर्द हो सकता है.

हाई यूरिक एसिड लेवल के कारण आंखों में दिख सकते हैं ये लक्षण
ड्राई आई डिजीज: यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर ड्राई आई डिजीज से जुड़ा है, जो कम आंसू उत्पादन के कारण आंखों में सूखापन पैदा करता है. इसके लक्षणों में जलन, लालिमा, जलन और धुंधली दृष्टि शामिल हैं. आंखों में लगातार सूखापन कॉर्निया को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है और लंबे समय तक दृष्टि संबंधी असुविधा हो सकती है. गाउट या लगातार हाइपरयूरिसीमिया से पीड़ित व्यक्तियों में इस स्थिति के विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है, इसलिए समय समय पर आंखों की जांच करवाना बहुत जरूरी है.
ऑक्यूलर टोफी का निर्माण: नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, ऑक्यूलर टोफी मोनोसोडियम यूरेट क्रिस्टल के जमाव होते हैं जो आंख के विभिन्न भागों, जैसे पलकें, कंजंक्टिवा, कॉर्निया या श्वेतपटल(sclera ) में बन सकते हैं. ये लंबे समय तक अनियंत्रित हाई यूरिक एसिड लेवल (हाइपरयूरिसीमिया) का संकेत हैं, जो अक्सर गाउट से जुड़ा होता है, और लालिमा, सूजन या बेचैनी पैदा कर सकता है. हालांकि ये आमतौर पर दर्द रहित होते हैं.
यूवाइटिस (uveitis): नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (एनएलएम) के अनुसार, यूवाइटिस, यूवियल ट्रैक्ट (आइरिस, सिलिअरी बॉडी और कोरॉइड) की सूजन, यूरिक एसिड के बढ़े हुए लेवल से जुड़ी होती है. इसके लक्षणों में आंखों में दर्द, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, धुंधली दृष्टि और फ्लोटर्स शामिल हैं. अगर इलाज न किया जाए, तो यूवाइटिस परमानेंट विजन लॉस का कारण बन सकता है. हाइपरयूरिसीमिया systemic inflammation और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के माध्यम से यूवाइटिस में योगदान दे सकता है, जिससे रिस्क वाले व्यक्तियों में रेगुलर मॉनिटरिंग की आवश्यकता पर जोर पड़ता है.
ग्लूकोमा: ग्लूकोमा में ऑप्टिक नर्व को नुकसान होता है, जो अक्सर बढ़े हुए इनर आई दबाव के कारण होता है. अध्ययनों से पता चलता है कि हाई यूरिक एसिड का लेवल आंखों में ऑक्सीडेटिव स्ट्रोस और Vascular dysfunction को बढ़ावा देकर ग्लूकोमा में योगदान दे सकता है. क्रोनिक हाइपरयूरिसीमिया ऑप्टिक नर्व डैमेज को बढ़ा सकता है, खासकर उन व्यक्तियों में जिनमें पहले से ही रिस्क फैक्टर्स मौजूद हैं, जो आंखों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए यूरिक एसिड के लेवल को कंट्रोल करने के महत्व को दर्शाता है.
रेटिना संबंधी जटिलताएं (Retinal complications): नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (एनएलएम) के अनुसार, लगातार हाइपरयूरिसीमिया रेटिना में Microvascular changes पैदा कर सकता है, जिसमें capillary density में कमी और रेटिनोपैथी शामिल है. यूरिक एसिड से प्रेरित ऑक्सीडेटिव स्ट्रोस और सिस्टमैटिक इंफ्लेमेशन रेटिना की वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे दृष्टि पर संभावित रूप से असर पड़ सकता है. रेटिना संबंधी जटिलताओं को रोकने के लिए, विशेष रूप से अन्य हृदय या चयापचय संबंधी स्थितियों वाले रोगियों में, रेगुलर आई टेस्ट और यूरिक एसिड के लेवल को कंट्रोल करना महत्वपूर्ण है.


