हजारीबाग: देवलिपि संस्कृत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए संस्कृतभारती इन दिनों निशुल्क कक्षाएं लगा रही है. जहां विद्यालय और महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को संस्कृत बोलने की शिक्षा दी जा रही है. जिससे वे देवलिपि संस्कृत को बोलचाल की भाषा के रूप में उपयोग में ला सकें.
- हजारीबाग में इन दिनों संस्कृत पढ़ने और बोलने की निशुल्क शिक्षा दी जा रही है. आधुनिक युग में जहां अंग्रेजी स्पोकन क्लास की भरमार है, वहीं संस्कृत बोलने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है. जिससे वे देवभाषा संस्कृत को समझ सकें और इस भाषा में बातचीत कर सकें. संस्कृतभारती की ओर से हजारीबाग में कक्षाएं भी चल रही हैं. संस्कृत पढ़ाने वाले शिक्षक कहते हैं कि यह देवभाषा है. सभी भाषाओं की जननी है. भारत की यह अपनी भाषा है. यही कारण है कि बच्चों को संस्कृत बोलने की शिक्षा दी जा रही है
विद्यालय और महाविद्यालय में ठंड की छुट्टी हो गई है. लोग घूमने के लिए बाहर जाते हैं. लेकिन हजारीबाग में लगभग 50 से अधिक बच्चे संस्कृत पढ़ना और बोलना सीख रहे हैं. बच्चों का कहना है कि समय का सदुपयोग करना चाहिए. यह भाषा हमारी अपनी भाषा है. जो बोलचाल में उपयोग नहीं आती. इस भाषा की जानकारी सभी लोगों को होनी चाहिए. यह भाषाओं की जननी है. बच्चों ने कहा कि भाषा की मां के बारे में लोग नहीं जानेंगे तो यह सरासर गलत होगा. इसी उद्देश्य से संस्कृत बोलना सीखने के लिए आए हैं.
वेद संस्कृत भाषा में होने के कारण इसे वैदिक भाषा भी कहते हैं. ‘संस्कृत’ शब्द का अर्थ होता है परिष्कृत, पूर्ण एवं अलंकृत. संस्कृत में बहुत कम शब्दों में अधिक अर्थ प्रकट किए जा सकते हैं. इसमें जैसा लिखा जाता है, वैसा ही उच्चारण किया जाता है. संस्कृत में भाषागत त्रुटियां नहीं मिलतीं. भाषाविद मानते हैं कि विश्व की सभी भाषाओं की उत्पत्ति का तार कहीं न कहीं संस्कृत से जुड़ा है. यही कारण है कि इस भाषा के बारे में सभी को जानकारी होनी चाहिए. नई पीढ़ी को इसे बोलना भी सीखना चाहिए.


