हजारीबागः जिला के आदिवासी समाज के आर्टिस्ट्स के लिए भारत सरकार आदिवासी मंत्रालय की ओर से ट्राइबल आर्टिजन इम्पैनलमेंट मेला का आयोजन किया गया. जिसमें समाज के लोगों ने अपने कलाकृतियों को आम जनता के सामने रखा. इस मेले का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज के कलाकारों को एक मंच देना है. जिससे वह अपना उत्पाद बेच सके और आर्थिक रूप से सशक्त हो सके.
आदिवासी समाज के कलाकारों को बेहतर प्लेटफार्म देने के लिए भारत सरकार इन दिनों कई कार्यक्रम चला रही है. हजारीबाग में आदिवासी समाज के कलाकारों के लिए मेला का आयोजन किया गया. जिसका उद्देश्य उन्हें बेहतर प्लेटफार्म देना है ताकि वह अपना उत्पाद बेच सके और लोगों को इसके बारे में बता भी सके.
हजारीबाग में आयोजित इस कार्यक्रम में 100 से अधिक आदिवासी समाज के आर्टिस्ट पहुंचे. उन्होंने अपना उत्पाद प्रस्तुत किया. जिसमें मुख्य रूप से सोहराय कला, मिट्टी के बर्तन, कपड़े, लाह की चूड़ी, ग्रामीण क्षेत्र का अचार और मड़ुवा की खाद्य सामग्री प्रमुख रही. कारीगरों ने बताया कि इस तरह का आयोजन सुदूरवर्ती ग्रामीण और जंगली क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी समाज के कलाकारों के लिए बेहतर प्लेटफार्म होता है. जहां वह अपने उत्पाद के बारे में बताते हैं और यही उम्मीद करते हैं कि उन्हें एक बेहतर बाजार मिल सके ताकि वह आर्थिक रूप से संपन्न हो सके.
रांची से आए पदाधिकारी ने बताया कि ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया और जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा देश के विभिन्न जिलों में ‘ट्राइबल आर्टिजन इम्पैनलमेंट मेला’ आयोजित किया जा रहा है. यह मेला आदिवासी कारीगरों की प्रतिभा को पहचान दिलाने, उन्हें ‘ट्राइब्स इंडिया’ के साथ जोड़ने, उत्पाद विकास के लिए प्रशिक्षण देने और उनके हस्तशिल्प व उत्पादों को राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने का एक मंच है. इस तरह का मेला आदिवासी समाज के कलाकारों को बेहतर बाजार देता है. साथ ही कई ऐसे कलाकृति हैं जो विलुप्त होने के कगार पर हैं उन्हें संजोने में मील का पत्थर साबित होता है.



