स्वास्थ्य, मेडिकल उपकरण और फार्मा कंपनियों ने सरकार से केंद्रीय बजट 2026-27 में टैक्स बोझ कम करने और अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश बढ़ाने की मांग की है. उनका कहना है कि इससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और बीमारियों से बचाव के उपाय तेज होंगे.
मेडिकल उपकरण पर उच्च कर बोझ
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों के अनुसार, कई जरूरी उपकरणों पर कुल कर 30% तक पहुंच जाता है. एमटीएआई अध्यक्ष पवन चौधरी ने कहा, ज्यादा कर की वजह से गंभीर बीमारियों का इलाज, सर्जरी और एनसीडी (गैर-संक्रामक बीमारियों) का प्रबंधन महंगा हो जाता है. इससे परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है.
उन्होंने यह भी कहा कि आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के कारण लागत बढ़ रही है. ऐसे में शुल्क में थोड़ी भी कटौती केवल राहत नहीं, बल्कि इलाज को किफायती बनाए रखने के लिए जरूरी है.
जीएसटी सुधारों में अभी भी कमी
यह मांग ऐसे समय में आई है जब जीएसटी को तर्कसंगत बनाने की कोशिश की जा रही है. कई तैयार उपकरणों पर अब 5% GST लगता है, जबकि इनपुट और इनपुट सेवाओं पर 18% कर लागू है. उद्योग का कहना है कि नई छूट का फायदा उन्हें नहीं मिल पा रहा और निर्माताओं की कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ गया है.
पॉली मेडिक्योर के प्रबंध निदेशक हिमांशु वैद्य के अनुसार, यदि मेडिकल उपकरणों पर दवाओं जितना 5% GST लगे और इनपुट सेवाओं तथा पूंजीगत वस्तुओं पर कर रिफंड मिले, तो कंपनियों को तुरंत राहत मिलेगी और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सभी को समान अवसर मिलेगा.
R&D और स्वास्थ्य जांच में निवेश
कंपनियों ने सरकार से अनुरोध किया है कि टैक्स कम करने के साथ R&D और निवारक स्वास्थ्य जांच में निवेश बढ़ाया जाए. हिमांशु वैद्य ने कहा कि अगर 1,000 करोड़ रुपये का अलग फंड बनाया जाए तो भारत में बने मेडिकल उपकरणों की गुणवत्ता बेहतर होगी और देश वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेगा.
स्वास्थ्य सेवा उद्योग की संस्था नटहेल्थ ने सुझाव दिया कि यदि कोई व्यक्ति आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत जांच कराता है, तो उसे 10,000 रुपये तक की कर छूट दी जाए. नटहेल्थ अध्यक्ष अमीरा शाह के अनुसार, इससे लोग ज्यादा जांच कराएंगे, गैर-संक्रामक बीमारियों का जल्दी पता चलेगा और इलाज तथा काम में होने वाला नुकसान कम होगा.
उम्मीदें और बजट की अपेक्षाएं
स्वास्थ्य उद्योग को उम्मीद है कि बजट 2026-27 में टैक्स राहत, अनुसंधान, घरेलू निर्माण और निवारक स्वास्थ्य उपायों पर ध्यान दिया जाएगा. इससे इलाज सस्ता होगा, स्वास्थ्य सेवाएं ज्यादा उपलब्ध होंगी और डिजिटल हेल्थ डेटा भी मजबूत होगा.


