Tuesday, March 24, 2026

सोने-चांदी की कीमतों में 4% तक की भारी गिरावट आई.

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मुंबई: भारतीय और वैश्विक सर्राफा बाजारों में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई. पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव कम होने की खबरों और अमेरिका व ईरान के बीच बातचीत की सुगबुगाहट ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की चमक को कम कर दिया है. घरेलू बाजार में जहां सोना करीब 2 प्रतिशत टूटा, वहीं चांदी की कीमतों में 4.70 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट देखी गई.

क्या रही कीमतों की स्थिति?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल वायदा सोने की कीमतों में सुबह के सत्र में भारी बिकवाली देखी गई. सोना करीब 2,576 रुपये या 2% गिरकर 1,36,684 रुपये प्रति 10 ग्राम के इंट्रा-डे लो (निचले स्तर) पर पहुंच गया. हालांकि, दोपहर तक यह मामूली सुधार के साथ 1,37,100 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था.

चांदी की स्थिति और भी खराब रही. मई वायदा चांदी 4.73 प्रतिशत या 10,667 रुपये की भारी गिरावट के साथ 2,14,500 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई. अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में भी यही हाल रहा, जहां सोना 1.6% गिरकर 4,368 डॉलर और चांदी 4% गिरकर 66.56 डॉलर प्रति औंस पर आ गई.

गिरावट की मुख्य वजह: कूटनीतिक हलचल
बाजार में इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए टालने की घोषणा की. उन्होंने संकेत दिया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच “सकारात्मक बातचीत” चल रही है. युद्ध की आशंका कम होने से निवेशकों ने सुरक्षित माने जाने वाले ‘सेफ हेवन’ यानी सोने से पैसा निकालकर अन्य जोखिम वाली संपत्तियों में लगाना शुरू कर दिया है.

हालांकि, बाजार में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद-बघेर गालबाफ ने बातचीत की खबरों को “फर्जी खबर” करार दिया है. उनका कहना है कि ऐसी खबरें केवल तेल और वित्तीय बाजारों को प्रभावित करने के लिए फैलाई जा रही हैं.

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोने का रुझान फिलहाल कमजोर बना हुआ है. यदि MCX पर सोना 1,34,000 रुपये के स्तर से नीचे गिरता है, तो यह 1,30,000 रुपये तक जा सकता है. चांदी के लिए भी चुनौतियां बरकरार हैं. जब तक वैश्विक बाजार में चांदी 68–70 डॉलर के प्रतिरोध स्तर को पार नहीं करती, तब तक इसमें और गिरावट की संभावना बनी रहेगी. निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे भू-राजनीतिक अपडेट पर नजर रखें, क्योंकि एक भी नकारात्मक खबर फिर से कीमतों में उछाल ला सकती है.

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