Saturday, April 4, 2026

सोना रिकॉर्ड ऊंचाई से 17% गिरकर ₹1,49,650 पर आया मजबूत डॉलर और ब्याज दरों के दबाव से कीमतें घटीं.

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नई दिल्ली: मध्य पूर्व में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के पांचवें सप्ताह में प्रवेश करने के बावजूद, भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी जा रही है. वर्तमान में सोने के दाम अपने अब तक के उच्चतम स्तर से लगभग 17 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे हैं.

शनिवार को समाप्त हुए कारोबारी सप्ताह में सोने की कीमतों में मामूली बढ़त जरूर दर्ज की गई, लेकिन व्यापक रुझान अभी भी दबाव का संकेत दे रहे हैं. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 1,49,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो इसके रिकॉर्ड स्तर 1,80,779 रुपये से लगभग 31,000 रुपये प्रति 10 ग्राम कम है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड 4,679.70 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रहा.

सुरक्षित निवेश की चमक क्यों हुई फीकी?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आम तौर पर युद्ध और अनिश्चितता के समय सोना ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित निवेश) माना जाता है. शुरुआत में इस संघर्ष ने सोने की कीमतों को सहारा दिया था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया संबोधन के बाद सेंटिमेंट बदल गया. राष्ट्रपति के कड़े रुख ने युद्धविराम की उम्मीदों को झटका दिया, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई.

डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल का असर
कीमतों में गिरावट का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मजबूत होता अमेरिकी डॉलर है. संघर्ष के कारण कच्चे तेल में आई तेजी ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति (महंगाई) की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है. जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्रा धारकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग और कीमतों पर लगाम लग जाती है.

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लचीलापन
हाल ही में आए अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों, विशेषकर ‘नॉन-फार्म पेरोल’ (NFP) और रोजगार के बेहतर आंकड़ों ने दर्शाया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है. इसके चलते ऐसी संभावनाएं प्रबल हो गई हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों पर अपना सख्त (Hawkish) रुख बरकरार रखेगा. उच्च ब्याज दरें सोने जैसे गैर-उपज वाले एसेट के आकर्षण को कम कर देती हैं.

आगे क्या है विशेषज्ञों की राय?
तकनीकी चार्ट पर विशेषज्ञों का मानना है कि सोने को 1,48,000 रुपये के स्तर पर मजबूत सपोर्ट मिल रहा है, जबकि 1,55,000 रुपये पर कड़ा प्रतिरोध (Resistance) देखा जा रहा है. आने वाले दिनों में सोने की चाल काफी हद तक अमेरिका के बेरोजगारी आंकड़ों, एडीपी रोजगार डेटा और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी.

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अगले कुछ हफ्तों तक सोने के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) बना रह सकता है.

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