मुंबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली. इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के पांचवें हफ्ते में प्रवेश करने के साथ ही वैश्विक बाजारों में डर का माहौल है, जिसका सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर पड़ा. घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी सोमवार को शुरुआती कारोबार में 1 प्रतिशत से अधिक टूट गए.
बाजार का हाल: आंकड़ों की जुबानी
सोमवार सुबह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,000 से अधिक अंकों या 1.38% की गिरावट के साथ 72,565 के स्तर पर खुला. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 267 अंकों की गिरावट के साथ 22,549 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया. बाजार के जानकारों के मुताबिक, 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के बाद से प्रमुख सूचकांकों में अब तक लगभग 10% की गिरावट आ चुकी है.
चौतरफा बिकवाली: कोई भी सेक्टर नहीं बचा
आज बाजार में चौतरफा गिरावट का रुख रहा. सबसे ज्यादा मार PSU बैंक और केमिकल सेक्टर पर पड़ी, जिनमें 3-4% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा रियलिटी, ऑटो और वित्तीय सेवा सूचकांकों में भी 3% तक की कमी आई. यहां तक कि डिफेंसिव माने जाने वाले सेक्टर जैसे FMCG, IT और फार्मा भी खुद को बिकवाली से नहीं बचा पाए और उनमें 2% तक की गिरावट देखी गई.
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
तनाव बढ़ने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है. ब्रेंट क्रूड वायदा 3.66% बढ़कर 116.70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, जो इसके 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है. भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई और चालू खाता घाटे (CAD) की चिंता बढ़ा रही हैं.
वैश्विक बाजारों का असर
भारतीय बाजारों में गिरावट का मुख्य कारण कमजोर वैश्विक संकेत भी हैं. अमेरिका का S&P 500 इंडेक्स 1.67% और नैस्डैक 2% गिरकर बंद हुआ. एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई (Nikkei) 4% तक टूट गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 3% और हांगकांग का हैंगसेंग 1% से ज्यादा नीचे रहा.
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में तकनीकी कारकों के बजाय भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर रहे हैं. निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे इस अस्थिरता के दौरान ओवरनाइट पोजीशन से बचें और केवल फंडामेंटली मजबूत शेयरों पर ही ध्यान दें. निफ्टी के लिए 22,450–22,500 एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है, जबकि रिकवरी के लिए 24,000 का स्तर पार करना जरूरी है.


